SIR voter list : कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने 13 राज्यों से जुड़े आंकड़े साझा करते हुए मतदाता सूची में नाम हटाने, आवेदन प्रक्रियाओं में गड़बड़ियों और आंकड़ों में विसंगतियों पर सवाल उठाए। खरगे ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं से मतदाताओं के अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चिंताएं पैदा होती हैं।

मोदी-शाह पर विपक्षी रैली दबाने का आरोप
खरगे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवाल सामने आने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के जनआंदोलन को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए। खरगे के मुताबिक, इंडिया गठबंधन प्रत्येक नागरिक के मतदान अधिकार और संविधान की रक्षा के लिए अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगा। विपक्ष ने एक नवंबर को प्रस्तावित रैली को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा है।

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में सामने आए मामले
खरगे की ओर से साझा किए गए विवरण के अनुसार, उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में फॉर्म-8 में बदलाव से जुड़े 10,470 कथित अनियमित मामलों के बाद एफआईआर दर्ज की गई और राज्यव्यापी ऑडिट शुरू हुआ। इसके अलावा 158 एमएलसी मतदाता सूची प्रविष्टियों में सॉफ्टवेयर से जुड़ी नाम संबंधी गलतियों का उल्लेख किया गया। महाराष्ट्र के संबंध में दावा किया गया कि एसआईआर के ड्राफ्ट रोल से 2.07 करोड़ नाम हटे और एमएलसी सूचियों में कंप्यूटर तथा स्वचालित अनुवाद से संबंधित त्रुटियां सामने आईं।
बंगाल, राजस्थान और गुजरात के आंकड़ों पर सवाल
पश्चिम बंगाल के बारे में खरगे ने कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों की अपीलों में 93 प्रतिशत सफल रहीं। राजस्थान में भारतीय निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग की सूचियों के बीच लगभग 30 लाख विसंगतियों का दावा किया गया। गुजरात में एसआईआर के बाद मतदाता सूची में 68.12 लाख नाम घटने और नाम दोबारा जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाए जाने का उल्लेख किया गया।
दक्षिण और पूर्वी राज्यों में फॉर्म-7 पर विवाद
कर्नाटक में चुनाव अधिकारियों द्वारा 61,059 लोगों के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 भरने का मुद्दा उठाया गया। आंध्र प्रदेश में 20,959 फॉर्म-7 आवेदनों में अधिकारियों को आपत्ति दर्ज कराने वाले के रूप में नामित किए जाने का दावा किया गया। ओडिशा के धामनगर में 3,000 से अधिक नाम हटाने के आवेदन आए, जिनके दुरुपयोग की आशंका बूथ स्तर के अधिकारियों ने जताई। तेलंगाना में ड्राफ्ट रोल से 73.39 लाख नाम हटाए जाने का आंकड़ा भी साझा किया गया।

झारखंड, हरियाणा, दिल्ली और गोवा की स्थिति
झारखंड के चतरा विधानसभा क्षेत्र में 4,790 फॉर्म-7 आवेदन आने का दावा किया गया, जो राज्य के कुल आवेदनों का लगभग 36 प्रतिशत बताया गया। हरियाणा में 44.91 लाख सत्यापन नोटिस जारी होने और एक अक्टूबर तक 4.35 लाख सुनवाइयां लंबित रहने का उल्लेख है। दिल्ली में ड्राफ्ट रोल से 47.5 लाख नाम हटने और मीडिया जांच के बाद फॉर्म-6 निपटान के आंकड़े संशोधित किए जाने का दावा किया गया। गोवा में ECINet पर रोलबैक सुविधा की कमी के कारण 97 पात्र मतदाताओं की बहाली शुरुआत में नहीं हो सकी।
मतदाता अधिकारों पर सियासी बहस तेज
खरगे द्वारा साझा किए गए इन आंकड़ों ने एसआईआर की प्रक्रिया, मतदाता सूची की शुद्धता और शिकायतों के निपटारे को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रत्येक मामले का आधिकारिक संदर्भ अलग-अलग जांच का विषय है। मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे अपने नाम की स्थिति जांचें और किसी त्रुटि की स्थिति में निर्वाचन आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुधार या अपील करें।
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