Israel Election 2026 : इजरायल में मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को आम चुनाव के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केंद्रों पर पहुंचे। यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ युद्ध, सुरक्षा और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दे भी मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। चुनावी मुकाबला कड़ा बताया जा रहा है और अंतिम तस्वीर सरकार बनाने की संभावनाओं पर निर्भर करेगी।

दोपहर दो बजे तक 44.9 प्रतिशत मतदान
इजरायल के केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार, स्थानीय समयानुसार दोपहर दो बजे तक 44.9 प्रतिशत पात्र मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुके थे। यह 1973 से उपलब्ध आंकड़ों में उस समय तक दर्ज सबसे ऊंचे मतदान स्तर के रूप में रिपोर्ट किया गया। 2022 के चुनाव में इसी समय तक 38.9 प्रतिशत मतदान हुआ था। मतदान में तेजी को चुनाव के प्रति मतदाताओं की सक्रियता का संकेत माना जा रहा है, हालांकि इससे अपने आप किसी दल की जीत तय नहीं होती।

नेतन्याहू ने जताई अरब मतदाताओं की भागीदारी पर चिंता
मतदान करने के बाद नेतन्याहू ने अरब समुदाय के मतदाताओं की अधिक भागीदारी पर चिंता जताई और चुनाव में गड़बड़ी की आशंका से जुड़ा बयान दिया। उनके प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू चुनाव परिणामों को चुनौती देने की जमीन तैयार कर रहे हैं। ये राजनीतिक आरोप हैं; चुनाव में व्यापक अनियमितताओं के दावों को लेकर चुनाव अधिकारियों की आधिकारिक टिप्पणियों और जांच के निष्कर्षों को अलग से देखना जरूरी है।
गादी आइजेनकोट ने बदलाव की अपील की
पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में चुनाव मैदान में हैं। उनकी याशर पार्टी विपक्षी गठबंधन का हिस्सा है, जिसमें दक्षिणपंथ से लेकर मध्य-वामपंथ तक के दल शामिल हैं। आइजेनकोट ने मतदाताओं से चुनावी मुद्दों पर ध्यान देने और सरकार बदलने के लिए मतदान करने की अपील की। उनके बेटे गाल की गाजा में लड़ाई के दौरान मौत हुई थी; चुनाव से पहले उन्होंने बेटे की कब्र पर श्रद्धांजलि भी दी।
युद्ध, सुरक्षा और जवाबदेही चुनाव के केंद्र में
चुनावी अभियान में 7 अक्टूबर के हमले के बाद की सुरक्षा व्यवस्था, गाजा में सैन्य अभियान, लेबनान और ईरान से जुड़े संघर्ष तथा सरकार की जवाबदेही प्रमुख मुद्दे रहे। नेतन्याहू ने अपनी सुरक्षा नीति और इजरायल के दुश्मनों से मुकाबले के अनुभव को रेखांकित किया है। वहीं विपक्षी नेताओं ने हमले से जुड़ी विफलताओं की जवाबदेही और सरकारी नीतियों पर सवाल उठाए हैं। युद्ध और अंतरराष्ट्रीय आलोचना ने चुनावी बहस को और जटिल बना दिया है।

बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी
इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों का समर्थन आवश्यक है। किसी एक पार्टी के स्पष्ट बहुमत हासिल करने की संभावना कम बताई गई है, इसलिए चुनाव के बाद गठबंधन वार्ता निर्णायक हो सकती है। मतदान केंद्र रात 10 बजे बंद होने निर्धारित थे। शुरुआती संकेतों के बाद भी अंतिम नतीजों और सीटों के बंटवारे में समय लग सकता है। यदि दलों के बीच सहमति नहीं बनती, तो राजनीतिक गतिरोध या नए चुनाव की संभावना भी बनी रह सकती है।
Read More : RAF Fairford Case: RAF फेयरफोर्ड मामले में दो ब्रिटिश नागरिकों पर आरोप, ईरान से कथित कनेक्शन की जांच तेज

