Yemen News : यमन में सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। बुधवार, 28 अक्टूबर को यमन के उत्तर-पश्चिमी अल-जौफ प्रांत के हज्म इलाके में एक पेट्रोल पंप पर भीषण बमबारी की खबर सामने आई है। इस हमले में महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य घायल बताए गए हैं। हूती विद्रोहियों से जुड़ी समाचार एजेंसी अल-मसीरा ने इस घटना की जानकारी दी है। हालांकि, हमले से जुड़े सभी विवरणों और स्वतंत्र पुष्टि की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

सऊदी गठबंधन और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ा तनाव
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच तनाव जुलाई से दोबारा बढ़ना शुरू हुआ था। सितंबर में यह टकराव और अधिक हिंसक हो गया। इस दौरान हूती विद्रोहियों ने मोखा समेत कई रणनीतिक इलाकों पर कब्जा कर लिया। इन क्षेत्रों पर नियंत्रण वापस हासिल करने के उद्देश्य से सऊदी गठबंधन ने कथित तौर पर ‘ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन’ शुरू किया। इसके बाद क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई और संघर्ष को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। लगातार जारी टकराव का असर स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ने की आशंका है।

बमबारी के बीच शांति वार्ता की कोशिशें
यमन में सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक स्तर पर संघर्ष समाप्त करने की कोशिशों की खबरें भी सामने आई हैं। इजरायली समाचार माध्यम ‘इजराइल हयोम’ और फ्रांसीसी समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्टों के हवाले से दावा किया गया है कि सऊदी अरब हूती विद्रोहियों के साथ समझौते की संभावनाएं तलाश रहा है। हालांकि, प्रस्ताव की मौजूदा स्थिति, वार्ता में शामिल पक्षों की सहमति और किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।
सऊदी अरब की शर्त और एक अरब डॉलर का प्रस्ताव
रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब की प्रमुख शर्त यह है कि हूती विद्रोही उसके तेल रिफाइनरियों, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों पर हमले बंद करें। इसके बदले रियाद हूती नियंत्रित क्षेत्रों के लिए एक अरब डॉलर यानी 100 करोड़ डॉलर देने पर सहमत हो सकता है। इस कथित प्रस्ताव का उद्देश्य आर्थिक राहत उपलब्ध कराना और संघर्ष को रोकने की दिशा में रास्ता तलाशना बताया जा रहा है। हालांकि, इसे अंतिम समझौता या भुगतान की पुष्टि मानना उचित नहीं होगा।
सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पुनर्निर्माण पर खर्च
बताया गया है कि प्रस्तावित धनराशि का बड़ा हिस्सा हूती नियंत्रित क्षेत्रों में सरकारी कर्मचारियों के बकाया वेतन चुकाने और युद्ध से क्षतिग्रस्त घरों, सड़कों तथा अन्य बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण पर खर्च किया जा सकता है। लंबे समय से जारी संघर्ष ने यमन की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। ऐसे में आर्थिक सहायता किसी संभावित शांति समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।

ईरान की मध्यस्थता, लेकिन समझौते पर संशय
रिपोर्ट में ईरान को सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए बताया गया है। हालांकि, प्रस्तावित एक अरब डॉलर की राशि वास्तव में तय हुई है या नहीं, और दोनों पक्ष शर्तों को स्वीकार करेंगे या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल, यमन में ताजा बमबारी और शांति प्रयासों की खबरों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कूटनीतिक पहल संघर्ष को रोक पाएगी।
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