Pramod Tiwari Attack : राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा और वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल कथित चढ़ावे की चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके अनुसार इससे पहले भी कई गंभीर सवाल उठते रहे हैं। तिवारी ने दावा किया कि उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन और मंदिर निर्माण से जुड़े कई घटनाक्रमों को करीब से देखा है। उन्होंने यह भी कहा कि वह उत्तर प्रदेश के निवासी होने के कारण इस पूरे आंदोलन से लंबे समय से जुड़े रहे हैं।

राम मंदिर आंदोलन को लेकर जताई अपनी राय
प्रमोद तिवारी ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के शुरुआती दौर में प्रमुख नारा था, “राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।” उन्होंने दावा किया कि जब उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार थी, तब उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से मंदिर निर्माण को लेकर चर्चा की थी। उनके अनुसार उस समय उन्हें बताया गया था कि केंद्र में सरकार बनने के बाद कानून बनाकर मंदिर का निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में केंद्र में सरकार बनने के बावजूद यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी और उनकी राय में भाजपा ने लंबे समय तक इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से जीवित रखा।

मंदिर निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का किया उल्लेख
राज्यसभा सांसद ने कहा कि उनकी दृष्टि में राम मंदिर का निर्माण सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद संभव हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण और उद्घाटन की समय-सीमा को लेकर भी राजनीतिक निर्णय लिए गए। प्रमोद तिवारी ने यह भी कहा कि उनकी व्यक्तिगत मान्यता के अनुसार मंदिर निर्माण से जुड़े कुछ निर्णयों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए थी। हालांकि, यह उनके व्यक्तिगत राजनीतिक विचार हैं और इस संबंध में विभिन्न पक्षों की अलग-अलग राय रही है।
पूजा और आयोजन के खर्च पर उठाए सवाल
प्रमोद तिवारी ने मंदिर उद्घाटन समारोह के दौरान हुए खर्च को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पूजा, सजावट और अन्य व्यवस्थाओं पर बड़ी राशि खर्च की गई। उनके अनुसार आयोजन में इस्तेमाल की गई कई वस्तुओं की लागत को लेकर भी पारदर्शिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़े प्रबंधन पर कोई आरोप लगते हैं, तो संबंधित पक्षों को स्पष्ट रूप से जवाब देना चाहिए ताकि लोगों के मन में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
एसआईटी जांच की उठाई मांग
प्रमोद तिवारी ने पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) से कराने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण से जुड़े कुछ भूमि सौदों और आर्थिक लेनदेन को लेकर पहले भी सवाल उठाए गए थे। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना सबसे अधिक आवश्यक है।

पप्पू यादव मामले का भी किया जिक्र
प्रेस वार्ता के दौरान प्रमोद तिवारी ने निर्दलीय सांसद पप्पू यादव से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यदि धार्मिक प्रतीकों या वस्त्रों के उपयोग को लेकर कार्रवाई की जाती है, तो उसके मानदंड सभी पर समान रूप से लागू होने चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार है और किसी भी कार्रवाई में समानता तथा निष्पक्षता का सिद्धांत अपनाया जाना चाहिए।
कुछ तस्वीरों और वीडियो पर भी जताई आपत्ति
प्रमोद तिवारी ने कुछ सार्वजनिक तस्वीरों और वीडियो का हवाला देते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े प्रतीकों और आयोजनों को लेकर संवेदनशीलता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी का उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। उनके अनुसार धार्मिक आस्था से जुड़े किसी भी संस्थान में यदि वित्तीय या प्रशासनिक सवाल उठते हैं तो उनका निष्पक्ष समाधान होना चाहिए।
सरकार और ट्रस्ट से पारदर्शिता की मांग
अपने बयान के अंत में प्रमोद तिवारी ने कहा कि यदि मंदिर ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद हुआ है, तो उस ट्रस्ट के कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच सामने आ सके। वहीं, इस पूरे मामले में संबंधित ट्रस्ट और सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया तथा जांच एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। किसी भी आरोप की पुष्टि संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
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