Brain Stroke in Youth : मेडिकल साइंस और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र से एक बेहद डरावनी और चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। ब्रेन स्ट्रोक अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित रहने वाली बीमारी नहीं रह गया है, बल्कि युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में हर साल लगभग 1.2 करोड़ लोग ब्रेन स्ट्रोक का शिकार होते हैं, जिनमें से करीब 15 प्रतिशत मरीज 15 से 49 वर्ष की कम आयु सीमा वाले होते हैं। साल 1990 से 2021 के बीच युवाओं में स्ट्रोक के नए मामलों में 36 प्रतिशत की भयानक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो वैश्विक स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है।

क्यों बढ़ रहा है युवाओं में ब्रेन स्ट्रोक का खतरा?
फोर्टिस अस्पताल, नोएडा के न्यूरोलॉजी निदेशक डॉ. ज्योति बाला शर्मा के अनुसार, युवाओं में बढ़ते स्ट्रोक का सबसे मुख्य कारण बदलती जीवनशैली और रक्त वाहिकाओं (ब्लड वेसल्स) से जुड़े जोखिम हैं। शारीरिक गतिविधि (फिजिकल एक्टिविटी) की कमी, जंक फूड व अनहेल्दी खानपान, बढ़ता मोटापा, लंबे समय का तनाव, अधूरी नींद और वायु प्रदूषण कम उम्र में ही धमनियों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। इस भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण जिंदगी के कारण 20 से 30 साल के युवाओं की धमनियों में भी वही बदलाव आ रहे हैं, जो सामान्यतः 60 से 70 साल के बुजुर्गों की धमनियों में देखे जाते हैं।

डायबिटीज और अन्य बीमारियाँ बढ़ा रही हैं जोखिम
भारत में डायबिटीज और प्री-डायबिटीज के मामलों में हो रही बेतहाशा बढ़ोतरी भी स्ट्रोक के खतरे को कई गुना बढ़ा रही है। ICMR–INDIAB के अध्ययन के अनुसार, साल 2021 तक भारत में लगभग 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज और 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज से पीड़ित थे। डायबिटीज सीधे तौर पर रक्त वाहिकाओं को कमजोर और क्षतिग्रस्त कर देती है। इसके अलावा, हाई ब्लड प्रेशर (हाई बीपी), बढ़ा हुआ बैड कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, तंबाकू का सेवन, अत्यधिक शराब पीना और जरूरत से ज्यादा खाने की आदतें युवाओं के दिमाग की नसों को कमजोर कर स्ट्रोक का कारण बन रही हैं।
समय रहते कैसे करें स्ट्रोक से बचाव?
राहत और संतोष की बात यह है कि स्ट्रोक के अधिकांश मामलों को समय रहते सही आदतों से रोका जा सकता है। दैनिक जीवन में नियमित शारीरिक व्यायाम, संतुलित व पौष्टिक आहार, वजन पर नियंत्रण, तंबाकू और शराब से पूर्ण दूरी बनाकर स्ट्रोक के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसके साथ ही नियमित अंतराल पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना अनिवार्य है। यदि समय रहते शरीर की इन मूलभूत स्थितियों को नियंत्रित रखा जाए, तो दिमाग की नसों को फटने या ब्लॉक होने से आसानी से बचाया जा सकता है।
स्ट्रोक के चेतावनी संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी
ब्रेन स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को पहचानना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि चेहरे का अचानक एक तरफ झुक जाना, हाथ या पैर में अचानक सुन्नता या कमजोरी आना, बोलने या दूसरों की बात समझने में दिक्कत होना, धुंधला दिखाई देना या अचानक संतुलन बिगड़ना जैसे लक्षण दिखें, तो बिना एक मिनट गंवाए तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आज युवाओं के मस्तिष्क और सेहत की रक्षा करना हमारे समाज के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की नींव रखने के समान है।


