Gehun Ki Unnat Kismein : देश के अधिकांश हिस्सों में रबी सीजन की शुरुआत के साथ गेहूं की बुवाई की तैयारियां तेज हो गई हैं। किसान खेतों की जुताई करने, मिट्टी तैयार करने और अच्छी गुणवत्ता वाले बीज खरीदने में जुटे हैं। हालांकि, इस बार गेहूं की खेती करने वाले किसानों के सामने सिंचाई का खर्च बड़ी चुनौती बन सकता है। कई क्षेत्रों में कमजोर मानसून और सामान्य से कम बारिश के कारण जल स्रोतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में किसानों को फसल तैयार करने के लिए बार-बार सिंचाई करनी पड़ सकती है। इससे डीजल, बिजली और पानी पर होने वाला खर्च बढ़ जाता है। अगर किसान शुरुआत में ही कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली किस्मों का चुनाव करें, तो खेती की लागत कम करने में मदद मिल सकती है।

कम सिंचाई में अच्छी पैदावार के लिए गेहूं की 4 किस्में
कृषि क्षेत्र में गेहूं की कुछ ऐसी किस्मों का उल्लेख किया जाता है, जिन्हें सीमित सिंचाई की परिस्थितियों में उगाया जा सकता है। इनमें लोकवन, शक्तिवर्धक 4282, शक्तिवर्धक 8292 और सरबती गेहूं शामिल हैं। जिन किसानों के पास सिंचाई के सीमित साधन हैं या जिन्हें पानी के लिए अधिक खर्च करना पड़ता है, वे इन किस्मों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

इन किस्मों का चुनाव करते समय किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी की गुणवत्ता और उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का ध्यान रखना चाहिए। केवल कम पानी में उगने की जानकारी के आधार पर किसी भी किस्म की बुवाई करना उचित नहीं है। स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से इसकी उपयुक्तता की पुष्टि करना जरूरी है।
करीब 120 दिनों में तैयार हो सकती है गेहूं की फसल
बताया जाता है कि अनुकूल मौसम और उचित कृषि प्रबंधन मिलने पर इन किस्मों की फसल लगभग 120 दिनों में तैयार हो सकती है। इनके दाने भी अच्छे आकार के हो सकते हैं। हालांकि, फसल की वास्तविक अवधि और उत्पादन बुवाई के समय, तापमान, मिट्टी और देखभाल पर निर्भर करता है।
किसानों को यह समझना जरूरी है कि केवल उन्नत बीज खरीदने से अच्छी पैदावार की गारंटी नहीं मिलती। खेत की सही तैयारी, संतुलित खाद का इस्तेमाल, समय पर सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

बुवाई से पहले बीजोपचार करना न भूलें किसान
गेहूं की बेहतर फसल के लिए बीजोपचार एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। कई किसान जल्दबाजी में बिना उपचार किए ही बीजों की बुवाई कर देते हैं। इससे बीज और मिट्टी से फैलने वाली कुछ बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
कृषि सलाह के अनुसार, बीमारी और बीज की स्थिति को देखते हुए कार्बेन्डाजिम या थायरम जैसे फफूंदनाशकों से बीज उपचार किया जा सकता है। हालांकि, दवा की मात्रा उत्पाद के लेबल और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही निर्धारित करनी चाहिए। बिना जानकारी के रसायनों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
समय पर बुवाई और सही देखभाल से घटेगी खेती की लागत
गेहूं की खेती में बुवाई का सही समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। किसानों को अपने क्षेत्र की कृषि जलवायु के अनुसार समय पर बुवाई करनी चाहिए। खेत में पर्याप्त नमी होने पर बुवाई की तैयारी करना फायदेमंद हो सकता है। इसके साथ ही प्रमाणित बीजों का इस्तेमाल और संतुलित उर्वरक प्रबंधन भी जरूरी है।
जिन किसानों के पास पानी के सीमित साधन हैं, उन्हें ऐसी किस्मों का चयन करना चाहिए जो उनके इलाके की परिस्थितियों के अनुकूल हों। कम सिंचाई वाली किस्मों के साथ वैज्ञानिक खेती अपनाने से पानी की बचत और उत्पादन लागत कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अच्छी पैदावार के लिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है।


