Ladakh Liquor Policy 2026-27 : लद्दाख में नई आबकारी नीति को लेकर चल रहा विवाद अब एक नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। ऑल लद्दाख लिकर ट्रेडर्स एसोसिएशन ने शनिवार (31 अक्टूबर) को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के शराब संबंधी रुख पर सवाल खड़े किए हैं। एसोसिएशन ने न केवल लद्दाख को शराब मुक्त क्षेत्र बनाने की उनकी मांग पर आपत्ति जताई, बल्कि उनके अपने ब्रांड ‘उले टोपो’ (Ule Topo) की बिक्री और लाइसेंस को लेकर भी सवाल उठाए हैं। इस घटनाक्रम के बाद लद्दाख में शराब नीति को लेकर बहस तेज हो गई है।
नई आबकारी नीति में शराब दुकानों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव
लद्दाख प्रशासन की ओर से 1 जून 2026 को नई आबकारी नीति 2026-27 पेश की गई थी। इस नीति में केंद्र शासित प्रदेश में शराब की खुदरा दुकानों की संख्या मौजूदा दो से बढ़ाकर 20 करने का प्रस्ताव रखा गया है। इस फैसले का कई महिला संगठनों और सामाजिक समूहों ने विरोध किया है। सोनम वांगचुक ने भी नई नीति पर आपत्ति जताते हुए लद्दाख को ड्राई रीजन यानी शराब मुक्त क्षेत्र बनाए जाने की मांग का समर्थन किया है।

सोनम वांगचुक के वाइन ब्रांड उले टोपो पर भी उठे सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लिकर ट्रेडर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि ने वांगचुक के सेब से तैयार होने वाले पारंपरिक वाइन ब्रांड ‘उले टोपो’ को लेकर सवाल किया। एसोसिएशन ने पूछा कि क्या इस ब्रांड के पास अपने उत्पादों का निर्माण और बिक्री करने के लिए आवश्यक सरकारी लाइसेंस मौजूद है? यदि लाइसेंस नहीं है, तो प्रशासन ने अब तक इसकी बिक्री पर कार्रवाई क्यों नहीं की? संगठन ने प्रशासन से इस मामले में स्पष्ट स्थिति सामने रखने की मांग की है। हालांकि, एसोसिएशन की ओर से उठाए गए इन सवालों के आधार पर लाइसेंस संबंधी किसी अनियमितता की पुष्टि नहीं होती है।

शराब और पारंपरिक पेय को लेकर वांगचुक के रुख पर सवाल
एसोसिएशन के प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक शराब के मुद्दे पर अलग-अलग रुख अपना रहे हैं। उनका कहना था कि एक तरफ वांगचुक लद्दाख को शराब मुक्त क्षेत्र बनाने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने स्थानीय पारंपरिक मादक पेय ‘चांग’ के बारे में सकारात्मक बातें कही हैं। संगठन ने सवाल किया कि यदि शराब का सेवन सामाजिक समस्या है, तो सभी प्रकार के मादक पेय पदार्थों को लेकर एक समान नीति क्यों नहीं अपनाई जा रही है?
नशा, धूम्रपान और मांसाहार पर भी समान नियम लागू करने की मांग
लिकर ट्रेडर्स एसोसिएशन ने शराबबंदी की मांग को लेकर अन्य सामाजिक मुद्दों का भी जिक्र किया। प्रतिनिधि ने पूछा कि जब शराब के सेवन को लेकर प्रतिबंध लगाने की बात हो रही है, तो नशीले पदार्थों के सेवन, धूम्रपान और मांस खाने जैसी गतिविधियों पर भी समान रूप से चर्चा क्यों नहीं की जाती? संगठन का कहना है कि यदि इन सभी गतिविधियों पर एक जैसी सख्त व्यवस्था लागू की जाती है, तो वह पूरी तरह शराबबंदी का समर्थन करने के लिए तैयार है।

शराब व्यापारियों की आजीविका का मुद्दा भी उठाया
एसोसिएशन ने सोनम वांगचुक से शराब कारोबारियों की आजीविका में हस्तक्षेप नहीं करने की अपील की है। संगठन का तर्क है कि नई आबकारी नीति और शराब की दुकानों को लेकर होने वाले फैसलों का सीधा असर इस कारोबार से जुड़े लोगों की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। प्रतिनिधि ने वांगचुक पर चुनिंदा मुद्दों को उठाने का आरोप लगाते हुए कहा कि सामाजिक नियम सभी के लिए समान होने चाहिए।
महिला संगठनों का विरोध और ड्राई लद्दाख की मांग
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस लद्दाख की नई आबकारी नीति के खिलाफ महिला संगठनों के विरोध-प्रदर्शनों को स्थगित किए जाने के एक दिन बाद हुई। इस नीति के विरोध में चार संगठन सक्रिय हैं। इनकी प्रमुख मांग है कि नई आबकारी नीति को पूरी तरह वापस लिया जाए और लद्दाख को आधिकारिक तौर पर ड्राई यूनियन टेरिटरी घोषित किया जाए।फिलहाल शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव, व्यापारियों की आजीविका और सामाजिक संगठनों की शराबबंदी की मांग के बीच विवाद जारी है। अब देखना होगा कि लद्दाख प्रशासन उले टोपो के लाइसेंस से जुड़े सवालों और नई आबकारी नीति पर उठ रहे विरोध को लेकर क्या रुख अपनाता है।


