IDBI Bank Privatisation : IDBI बैंक के प्रस्तावित निजीकरण को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने बैंक को विदेशी कंपनी के हाथों बेचने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे संदिग्ध करार दिया है। कांग्रेस का दावा है कि बैंक को खरीदने वाली कंपनी सौदे की कुल रकम का बड़ा हिस्सा खुद बैंक की संपत्तियों और संसाधनों के जरिए चुकाने की योजना बना सकती है। पार्टी ने इस पूरी प्रक्रिया को रोकने और संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से जांच कराने की मांग की है।
जयराम रमेश का आरोप- बैंक के पैसे से ही बैंक खरीदा जा रहा
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि IDBI बैंक को खरीदने वाली विदेशी कंपनी उसी बैंक के पैसे के जरिए उसे सरकार से खरीदने की तैयारी कर रही है। उन्होंने इसे मोदी सरकार का एक और बड़ा घोटाला बताते हुए मामले की जांच की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि बोली लगाने वाली कंपनी पहले अपनी ओर से कुल खरीद मूल्य का 50 प्रतिशत से कम धन लगाएगी और शेष भुगतान के लिए बैंक की संपत्तियों या संसाधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और सौदे की वास्तविक वित्तीय संरचना को आधिकारिक दस्तावेजों से समझना जरूरी है।

कांग्रेस ने IDBI बैंक के मुनाफे और संपत्तियों का उठाया मुद्दा
जयराम रमेश ने बैंक के वित्तीय प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि IDBI बैंक ने पिछले कुछ वर्षों में हजारों करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है। कांग्रेस का सवाल है कि जिस बैंक के पास बड़ी संपत्ति और मजबूत वित्तीय आधार है, उसे विदेशी कंपनी को बेचने की जरूरत क्यों पड़ रही है। पार्टी के मुताबिक, इस सौदे में बैंक की संपत्तियों का मूल्यांकन और खरीद की शर्तें सार्वजनिक जांच के दायरे में होनी चाहिए। कांग्रेस ने मांग की है कि निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए और पूरे मामले की संसदीय स्तर पर जांच कराई जाए।

शक्ति सिंह गोहिल ने Fairfax और प्रेम वत्स पर उठाए सवाल
कांग्रेस के पूर्व सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने पार्टी कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान IDBI बैंक के प्रस्तावित सौदे को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक को कनाडा की कंपनी Fairfax के प्रेम वत्स को बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। गोहिल ने कहा कि IDBI बैंक के पास काफी संपत्तियां हैं, जिनमें कुछ का मूल्य अरबों रुपये हो सकता है। उन्होंने सवाल किया कि इतने महत्वपूर्ण भारतीय वित्तीय संस्थान को विदेशी कंपनी के हाथों सौंपने की जरूरत क्यों है। उनके मुताबिक, बैंक की संपत्तियों और सौदे की शर्तों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
RSS के स्वदेशी विचार पर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल
शक्ति सिंह गोहिल ने IDBI बैंक के निजीकरण के मुद्दे को राष्ट्रीय स्वदेशी नीति से भी जोड़ दिया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वदेशी विचार का हवाला देते हुए सवाल किया कि विदेशी कंपनी को बैंक बेचने के प्रस्ताव पर संघ और उसके प्रमुख मोहन भागवत की ओर से कोई आपत्ति क्यों नहीं जताई जा रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि जब स्वदेशी की बात की जाती है, तो ऐसे महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थान के विदेशी हाथों में जाने पर भी जवाब दिया जाना चाहिए। यह बयान कांग्रेस की राजनीतिक आलोचना का हिस्सा है।

राहुल गांधी और विपक्ष ने भी उठाए निजीकरण पर सवाल
IDBI बैंक के निजीकरण को लेकर राहुल गांधी सहित अन्य विपक्षी नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं। विपक्ष का तर्क है कि देश के एक प्रमुख वित्तीय संस्थान को विदेशी निवेशक के हाथों सौंपने से जुड़े सभी पहलुओं पर पारदर्शिता होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि बैंक की संपत्तियों, खरीद मूल्य, निवेशक की भूमिका और भुगतान की व्यवस्था की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
JPC जांच और निजीकरण रोकने की कांग्रेस की मांग
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से IDBI बैंक की बिक्री प्रक्रिया रोकने की मांग दोहराई है। पार्टी चाहती है कि संयुक्त संसदीय समिति इस सौदे की शर्तों, वित्तीय व्यवस्था और संभावित अनियमितताओं की जांच करे। फिलहाल कांग्रेस के आरोपों और मांगों के बीच IDBI बैंक का निजीकरण राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। इस मामले में सौदे की वास्तविक शर्तें और सरकार का पक्ष सामने आने के बाद ही विवाद के सभी पहलुओं की स्पष्ट तस्वीर मिल सकेगी।
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