Sachin Tendulkar Angry : भारतीय क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर को हमेशा शांत और संयमित खिलाड़ी के रूप में जाना जाता है। मैदान पर मुश्किल परिस्थितियों में भी उनका धैर्य अक्सर चर्चा का विषय रहा। हालांकि, उनके करियर में एक ऐसा मौका भी आया था, जब वह अपनी टीम के प्रदर्शन से बेहद नाराज हो गए थे। साल 1997 में वेस्टइंडीज दौरे पर बारबाडोस टेस्ट में मिली हार के बाद सचिन ने ड्रेसिंग रूम में खिलाड़ियों को कड़ी फटकार लगाई थी। उस समय वह भारतीय टीम की कप्तानी संभाल रहे थे।
बारबाडोस टेस्ट में जीत के करीब पहुंचकर हारी टीम इंडिया
भारत और वेस्टइंडीज के बीच मार्च 1997 में पांच टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जा रही थी। सीरीज के शुरुआती दोनों मुकाबले ड्रॉ रहे थे। इसके बाद तीसरा टेस्ट बारबाडोस के केंसिंग्टन ओवल मैदान पर खेला गया। इस मुकाबले में भारतीय टीम के पास इतिहास रचने और वेस्टइंडीज में जीत हासिल करने का शानदार मौका था, लेकिन बल्लेबाजों के निराशाजनक प्रदर्शन ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

पहली पारी में भारत ने बनाई थी 319 रन की बढ़त
मुकाबले में वेस्टइंडीज ने पहली पारी में 298 रन बनाए थे। इसके जवाब में भारतीय टीम ने सचिन तेंदुलकर के 92 और राहुल द्रविड़ के 78 रनों की मदद से 319 रन बनाए। इस तरह भारत को पहली पारी में 21 रन की बढ़त हासिल हुई। दूसरी पारी में भारतीय गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया और वेस्टइंडीज की टीम को केवल 140 रन पर समेट दिया। इसके बाद भारत के सामने जीत के लिए 120 रनों का लक्ष्य था।

120 रन का लक्ष्य भी हासिल नहीं कर पाई भारतीय टीम
भारतीय समर्थकों को उम्मीद थी कि टीम आसानी से लक्ष्य हासिल कर लेगी, लेकिन दूसरी पारी में बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई। एक के बाद एक विकेट गिरते चले गए और पूरी भारतीय टीम महज 81 रन पर सिमट गई। सचिन तेंदुलकर भी इस पारी में केवल चार रन बना सके। वेस्टइंडीज ने यह मुकाबला 38 रनों से जीत लिया। इतनी आसान स्थिति से मैच गंवाने के कारण भारतीय टीम की काफी आलोचना हुई।
ड्रेसिंग रूम में सचिन ने खिलाड़ियों को लगाई फटकार
इस हार के बाद कप्तान सचिन तेंदुलकर बेहद निराश और नाराज थे। अपनी आत्मकथा ‘Playing It My Way’ में उन्होंने उस दौर और टीम के प्रदर्शन को लेकर अपनी निराशा का जिक्र किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ड्रेसिंग रूम में उन्होंने खिलाड़ियों को साफ संदेश दिया था कि जो खिलाड़ी देश के लिए खेलने को गंभीरता से नहीं ले सकते, उन्हें टीम में खेलने के बारे में दोबारा सोचना चाहिए। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि गुस्से में उन्होंने पानी की बोतलें फेंकी थीं। हालांकि, इस घटना के हर विवरण को एक जैसा प्रमाणित नहीं माना जाना चाहिए।

वेस्टइंडीज ने 1-0 से जीती थी टेस्ट सीरीज
बारबाडोस टेस्ट में मिली हार का असर पूरी सीरीज पर पड़ा। पांच मैचों की इस टेस्ट सीरीज में भारत शुरुआती दो मुकाबले ड्रॉ करा चुका था। चौथा और पांचवां टेस्ट भी बराबरी पर समाप्त हुआ। इस तरह वेस्टइंडीज ने सीरीज 1-0 से अपने नाम कर ली। बारबाडोस में मिली 38 रनों की हार आज भी भारतीय क्रिकेट इतिहास के उन मुकाबलों में गिनी जाती है, जिसमें जीत बेहद करीब होने के बावजूद टीम इंडिया लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी।

