Chirag Paswan : बिहार शिक्षक और स्नातक एमएलसी चुनाव के नतीजों के बाद एनडीए के भीतर राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। चुनाव जीतने वाले दो निर्दलीय एमएलसी बंशीधर ब्रासवासी और राहुल राज के भाजपा में शामिल होने की खबरों ने नया विवाद खड़ा कर दिया। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए भाजपा को भी घेरा है।
चिराग पासवान ने भाजपा से पूछा गठबंधन धर्म का सवाल
चिराग पासवान का कहना है कि जिन निर्दलीय उम्मीदवारों ने गठबंधन के आधिकारिक प्रत्याशियों को हराकर जीत हासिल की, उन्हें उसी गठबंधन की दूसरी पार्टी में जगह देना कहां तक उचित है? उन्होंने इसे गठबंधन धर्म के खिलाफ बताया। इस मुद्दे पर जेडीयू नेता और एमएलसी नीरज कुमार ने भी भाजपा पर सवाल उठाए। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद दोनों निर्दलीय एमएलसी ने भाजपा में शामिल होने की खबरों का खंडन किया और कहा कि उन्होंने केवल बाहर से समर्थन दिया है।

अपनी ही सरकार पर सवाल उठाने से नहीं हिचकते चिराग
चिराग पासवान का यह रुख पहली बार सामने नहीं आया है। एनडीए का हिस्सा होने के बावजूद वह कई बार सरकार की नीतियों और कामकाज पर खुलकर सवाल उठा चुके हैं। राजनीतिक जानकार उनके ऐसे बयानों को प्रेशर पॉलिटिक्स से जोड़कर देखते हैं। उनका मानना है कि चिराग गठबंधन में अपनी अलग पहचान बनाए रखने के साथ सहयोगियों पर भी राजनीतिक दबाव बनाते हैं।

‘गठबंधन में हूं, लेकिन रीढ़विहीन नहीं हूं’
चिराग पासवान इन आरोपों को स्वीकार नहीं करते। उनका कहना है कि गठबंधन में शामिल होने का मतलब अपनी आवाज दबा देना नहीं है। उनका चर्चित बयान है, ‘गठबंधन में हूं, लेकिन रीढ़विहीन नहीं हूं।’ एक बातचीत में उन्होंने कहा कि वह सच को सच कहने में विश्वास रखते हैं। उनके मुताबिक, बयान देते समय वह यह नहीं सोचते कि किसे फायदा या नुकसान होगा। उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी जनता के प्रति है।
जमुई की घटना पर सरकार को घेरा था
इससे पहले जमुई में नाबालिग लड़की के साथ छेड़छाड़ और बदसलूकी की घटना पर चिराग ने सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि उन्हें शर्म आती है कि वह ऐसी सरकार का हिस्सा हैं। उनका कहना था कि यदि अपराधियों के मन में पुलिस का डर नहीं रहेगा तो कानून-व्यवस्था का क्या अर्थ रह जाएगा? उनके इस बयान से एनडीए सरकार को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा था।

मुख्य चुनाव आयुक्त के आंदोलन पर भी जताई थी अलग राय
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान भी चिराग ने गठबंधन की तय राजनीतिक लाइन से अलग रुख अपनाया था। उन्होंने कहा था कि युवाओं की ऊर्जा को रोका नहीं जा सकता और उनके विरोध के तरीकों पर सवाल उठाने के बजाय उनकी समस्याओं को समझना चाहिए। इस बयान ने एनडीए के भीतर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी थी।
भरत तिवारी एनकाउंटर पर पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद भी चिराग पासवान ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। वह बिलौटी गांव पहुंचकर परिजनों से मिले और न्याय का भरोसा दिया। परिवार का आरोप था कि भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था, फिर भी पुलिस ने उन्हें गोली मार दी। चिराग ने कहा था कि जिस तरह उनकी मौत हुई, उससे कुछ गलत होने की आशंका दिखाई देती है। उन्होंने मामले को उचित मंच तक पहुंचाने का भरोसा दिया था।
क्या चिराग की रणनीति NDA में दबाव बनाने का तरीका है?
लगातार अलग बयान देने के कारण चिराग की राजनीतिक रणनीति चर्चा में रहती है। विश्लेषकों के मुताबिक, वह गठबंधन में रहते हुए अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और प्रभाव बनाए रखना चाहते हैं। हालांकि चिराग का स्पष्ट कहना है कि गलत बात का समर्थन करना उनकी राजनीति नहीं है। उनके लिए गठबंधन से अधिक महत्वपूर्ण जनता का हित और अपनी अंतरात्मा की आवाज है।
Read More : Supreme Court Arrest Verdict : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पुलिस हिरासत के 24 घंटे नियम पर बदला कानून

