Sonia Gandhi Interview : कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर देश के सामाजिक और लोकतांत्रिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। ‘दि हिंदू’ को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों के दौरान देश के सामाजिक ताने-बाने, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को गंभीर चोट पहुंची है। सोनिया गांधी के मुताबिक, मौजूदा सरकार के सत्ता से हटने के बाद भी इन व्यवस्थाओं को दोबारा मजबूत और स्वस्थ स्थिति में लाना आसान नहीं होगा। इसके लिए लंबे समय तक लगातार प्रयास करने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि इस दिशा में केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि सभी राजनीतिक दलों को मिलकर व्यापक स्तर पर काम करना होगा।
सत्ता परिवर्तन के बाद भी आसान नहीं होगी व्यवस्था सुधारने की राह
सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में देश की मौजूदा राजनीतिक और संस्थागत स्थिति पर चिंता जताई। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने के लिए गंभीर प्रयासों की जरूरत होगी। उन्होंने संकेत दिया कि संस्थाओं को पहले जैसी मजबूती देने की प्रक्रिया में समय लग सकता है। उनके अनुसार, देश की राजनीतिक व्यवस्था को स्वस्थ बनाने की जिम्मेदारी सभी दलों की है। इस बयान के जरिए उन्होंने विपक्षी एकजुटता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आकलन है, जिस पर भाजपा की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।

अपनी आत्मकथा को लेकर सोनिया गांधी ने क्या कहा?
इंटरव्यू के दौरान सोनिया गांधी ने अपनी राजनीतिक यात्रा, भारत आने के अनुभव और निजी जीवन से जुड़े कई पहलुओं पर भी बात की। अपने ऊपर लिखी गई किताबों के बारे में उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनके जीवन पर इतनी पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक उन्हें अपने बारे में लिखी किताबें पढ़ने में कोई विशेष रुचि नहीं रही। राजीव गांधी के साथ रहते हुए दोनों ने यह समझ लिया था कि उनके बारे में क्या लिखा जा रहा है, इस पर लगातार नजर रखना जरूरी नहीं है। हालांकि, बाद में उन्हें महसूस हुआ कि अपनी जिंदगी और अनुभवों की कहानी खुद सामने रखनी चाहिए।

‘Belonging: A Journey of Love’ लिखने में लगे कई साल
अपनी आत्मकथा ‘Belonging: A Journey of Love’ के बारे में सोनिया गांधी ने बताया कि उन्होंने गंभीरता से लिखना लगभग पांच साल पहले शुरू किया था। यह लेखन लगातार चलने वाली प्रक्रिया नहीं थी। कई बार विचार और शब्द आसानी से मिल जाते थे, जबकि कुछ मौकों पर वह लिखने के लिए जरूरी अभिव्यक्ति नहीं खोज पाती थीं। ऐसी स्थिति में उन्हें निराशा भी होती थी और वह लिखना छोड़ देती थीं। उनके मुताबिक, यह किताब केवल उनके निजी जीवन का विवरण नहीं है, बल्कि राजीव गांधी, उनके परिवार और भारत के साथ विकसित हुए भावनात्मक रिश्ते की कहानी भी है।
राजीव गांधी और भारत से जुड़ाव की कहानी
सोनिया गांधी ने बताया कि राजीव गांधी से उनका रिश्ता केवल प्रेम कहानी तक सीमित नहीं रहा। समय के साथ उन्हें राजीव के परिवार और उस देश से भी लगाव हो गया, जिससे उनका परिवार जुड़ा था। धीरे-धीरे भारत उनकी अपनी पहचान और जीवन का हिस्सा बन गया। उन्होंने कहा कि इसी जुड़ाव ने उन्हें सार्वजनिक जीवन में आने की प्रेरणा दी। जब उन्हें लगा कि जिन मूल्यों और उद्देश्यों के लिए राजीव गांधी के परिवार ने कुर्बानियां दी थीं, वे खतरे में पड़ रहे हैं और कांग्रेस पार्टी कमजोर हो रही है, तब उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाने का फैसला किया।

परिवार, ईमानदारी और जिम्मेदारी को बताया जीवन का आधार
अपने व्यक्तित्व और जीवन मूल्यों पर बात करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि जिन सिद्धांतों के साथ वह बड़ी हुईं, वे आज भी उनके भीतर मौजूद हैं। परिवार और दोस्तों के प्रति वफादारी, दूसरों के साथ ईमानदारी, संवेदनशीलता और जिम्मेदारियों को निभाना उनके लिए महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों के मामले में वह आज भी वैसी ही हैं, जैसी राजीव गांधी से पहली मुलाकात के समय थीं। हालांकि, उन्होंने हल्के अंदाज में यह भी स्वीकार किया कि पहले वह ज्यादा मुस्कुराती और हंसती थीं।
भारत आने के बाद राजीव गांधी से मिली प्रेरणा
सोनिया गांधी ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि जब वह युवा दुल्हन के रूप में भारत आई थीं, तब उन्हें इस देश के बारे में बहुत कम जानकारी थी। समय के साथ उन्होंने राजीव गांधी से भारत को समझना सीखा। उनके साहस, संवेदनशीलता, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक भारत के प्रति प्रतिबद्धता तथा कर्तव्यनिष्ठा ने उन्हें प्रभावित किया। सोनिया के मुताबिक, कठिन और असमंजस भरे समय में इन्हीं मूल्यों ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।
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