Sonam Wangchuk : लद्दाख के राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधिमंडलों के बीच नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। गृह मंत्रालय की उप-समिति के साथ हुई इस बातचीत के बाद जलवायु कार्यकर्ता और लेह एपेक्स बॉडी (LAB) के प्रमुख सदस्य सोनम वांगचुक ने गहरी निराशा जताई। उन्होंने कहा कि लद्दाख की मांगों पर ठोस प्रगति नहीं होने की स्थिति में क्षेत्र में फिर आंदोलन खड़ा हो सकता है।
चुनी हुई लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर वांगचुक की चेतावनी
सोनम वांगचुक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लद्दाख में चुनी हुई लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित होने से पहले यदि केंद्र सरकार कोई बड़ा फैसला लागू करती है, तो स्थानीय लोग दोबारा सड़कों पर उतर सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसी स्थिति में एक बड़े जन आंदोलन की शुरुआत हो सकती है। वांगचुक लंबे समय से लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा और अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग से जुड़े रहे हैं।
चार महीने के इंतजार के बाद भी नहीं मिला प्रस्तावित ड्राफ्ट
लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) का प्रतिनिधिमंडल इस उम्मीद के साथ दिल्ली पहुंचा था कि गृह मंत्रालय प्रस्तावित केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय चुनी हुई संस्था का विस्तृत ढांचा सामने रखेगा। प्रतिनिधि विधानसभा मॉडल और उसके अधिकारों से जुड़े प्रावधानों पर स्पष्ट जानकारी चाहते थे। हालांकि, वांगचुक के मुताबिक चार महीने तक इंतजार के बाद भी बैठक में कोई ड्राफ्ट प्रस्तुत नहीं किया गया।
अगली बैठक के लिए सवाल मिलने पर जताई नाराजगी
सोनम वांगचुक ने बताया कि मसौदा देने के बजाय प्रतिनिधिमंडल को अगली बैठक के लिए सवालों की एक सूची दी गई। उन्होंने इस प्रक्रिया पर नाराजगी जताते हुए इसे मजाक जैसा बताया। उनका कहना है कि लद्दाख के प्रतिनिधि लंबे समय से जिन मुद्दों पर स्पष्ट प्रस्ताव की मांग कर रहे हैं, उन पर अब तक ठोस दस्तावेज सामने नहीं आया है।
सज्जाद कारगिली ने जमीन और रोजगार सुरक्षा पर रखी मांग
कारगिल के प्रतिनिधि सज्जाद कारगिली ने भी बैठक के नतीजे पर निराशा जाहिर की। उन्होंने कहा कि लद्दाख के लोग जमीन, रोजगार, संस्कृति और भाषा के संवैधानिक संरक्षण को लेकर स्पष्ट व्यवस्था चाहते हैं। प्रतिनिधियों की मांग है कि अनुच्छेद 371 के तहत प्रस्तावित विशेष संरक्षण से जुड़ा ड्राफ्ट जमीनी स्तर पर सामने लाया जाए, ताकि उसके प्रावधानों को स्पष्ट रूप से समझा जा सके।
मुख्य सचिव ने बातचीत को बताया सकारात्मक
वहीं, लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने बैठक को सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 371 के तहत विशेष शासन मॉडल को लेकर चर्चा आगे बढ़ रही है। केंद्र और प्रशासन के इस रुख से संकेत मिलता है कि विशेष संवैधानिक व्यवस्था को लेकर बातचीत अभी जारी है और आने वाली बैठकों में इसके स्वरूप पर अधिक स्पष्टता सामने आ सकती है।
हिंसा पीड़ितों को मुआवजे पर बनी सहमति
बैठक में पिछले साल 24 सितंबर को हुई हिंसा के पीड़ितों को जल्द मुआवजा देने के मुद्दे पर सहमति बनी। हालांकि, दर्ज मामलों को सामूहिक रूप से वापस लेने की मांग पर केंद्र सरकार ने फिलहाल और समय मांगा है। लद्दाख के प्रतिनिधिमंडलों ने मामलों की वापसी को भी अपनी प्रमुख मांगों में शामिल किया है।
संसद सत्र में कानून और चुनाव कराने की मांग
लद्दाख के राजनीतिक और सामाजिक समूहों ने मांग की है कि संसद के आगामी सत्र में क्षेत्र के लिए आवश्यक कानून बनाया जाए। इसके बाद चुनी हुई संस्था के गठन के लिए चुनाव कराए जाएं। प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित होने तक लद्दाख में जमीन या शासन से संबंधित कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
अक्टूबर में कारगिल बैठक पर टिकी नजरें
अब केंद्र और लद्दाख प्रतिनिधियों के बीच अगली बातचीत अक्टूबर के पहले सप्ताह में कारगिल में प्रस्तावित है। इस बैठक में संवैधानिक संरक्षण, चुनाव, जमीन, रोजगार और चुनी हुई संस्था जैसे मुद्दों पर आगे की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल दिल्ली बैठक के बाद सोनम वांगचुक की चेतावनी ने लद्दाख के आंदोलन को लेकर चर्चाओं को फिर तेज कर दिया है।
Read More : CG News : Arun Sao का अफसरों को फरमान, कुर्सी छोड़िए, सुबह फील्ड में उतरिए; फाइल नहीं बताएगी असली हाल