Omar Abdullah Resignation Offer : जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) में चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच शुक्रवार को पार्टी नेतृत्व और नाराज विधायकों के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। श्रीनगर के गुपकार स्थित फारूक अब्दुल्ला के आवास पर आयोजित इस बैठक में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला भी मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने इस्तीफा देने तक की पेशकश कर दी। हालांकि, बागी विधायकों ने उनकी इस पेशकश को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
उमर अब्दुल्ला ने कहा- मैं इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान उमर अब्दुल्ला एक समय नाराज होकर खड़े हो गए और बाहर जाने की कोशिश करने लगे। उन्होंने विधायकों से कहा कि उन पर काफी दबाव है और अगर यही स्थिति बनी रहती है तो वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।मुख्यमंत्री की इस पेशकश से बैठक में मौजूद विधायक असहज हो गए। विधायकों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य मुख्यमंत्री को पद से हटाना या पार्टी नेतृत्व में बदलाव कराना नहीं है। उनकी नाराजगी कुछ खास मुद्दों को लेकर है, जिन्हें बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।

बागी विधायकों ने इस्तीफे की पेशकश ठुकराई
बैठक में शामिल विधायकों ने उमर अब्दुल्ला की इस्तीफे की पेशकश स्वीकार नहीं की। इसके बजाय उन्होंने पार्टी और सरकार के कामकाज में सुधार के लिए कुछ सुझाव रखे। सहमति बनी कि प्रत्येक मंत्री के कामकाज और विभागों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए कंसल्टेटिव कमिटी बनाई जाएगी।इसके अलावा चुनाव के दौरान किए गए वादों की प्रगति पर नजर रखने के लिए मैनिफेस्टो कमिटी गठित करने पर भी सहमति बनी। नेतृत्व ने विधायकों को यह भरोसा दिलाया कि एक साल के भीतर कैबिनेट में किए गए बदलावों और व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी।

दो घंटे चली बैठक, उमर ने बताईं सरकार की चुनौतियां
गुपकार में हुई यह बैठक करीब दो घंटे तक चली। बैठक की शुरुआत में उमर अब्दुल्ला ने विधायकों को केंद्र शासित प्रदेश के ढांचे में सरकार चलाने की चुनौतियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सरकार किन परिस्थितियों में काम कर रही है, इसकी जानकारी विधायकों को होनी चाहिए।मुख्यमंत्री ने नाराज विधायकों से यह भी कहा कि उन्हें अपनी शिकायतें सार्वजनिक करने के बजाय पार्टी के भीतर बातचीत के जरिए मुद्दों को उठाना चाहिए था। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने सरकार के सामने मौजूद राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियों का भी जिक्र किया।
फारूक अब्दुल्ला ने भावुक भाषण देकर संभाला मामला
बैठक के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने भी हस्तक्षेप किया। एक विधायक के मुताबिक, उमर की इस्तीफे की पेशकश के बाद फारूक अब्दुल्ला ने भावुक भाषण दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा कि उन्हें इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय विधायकों की जायज शिकायतों और मांगों पर ध्यान देना चाहिए।बैठक के बाद फारूक अब्दुल्ला ने विधायकों के साथ मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि विधायकों की मांगें जायज हैं, लेकिन पार्टी में किसी तरह की फूट नहीं है। विधायकों ने भी स्पष्ट किया कि वे नेतृत्व परिवर्तन नहीं चाहते और उनकी चिंता केवल कुछ लंबित मुद्दों को लेकर थी।

कैबिनेट विस्तार के बाद शुरू हुआ था असंतोष
नेशनल कॉन्फ्रेंस में असंतोष की स्थिति 27 अक्टूबर को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सामने आई थी। उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर सरकार में चार नए मंत्रियों को शामिल किया गया था। इस फैसले के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ विधायक नाराज बताए गए और उन्होंने इस कदम पर सवाल उठाए।इसके बाद असंतुष्ट विधायकों की कई बैठकें हुईं। अब गुपकार में हुई ताजा बैठक के बाद कंसल्टेटिव कमिटी, मैनिफेस्टो कमिटी और कैबिनेट व्यवस्था की समीक्षा जैसे मुद्दों पर सहमति बनी है। फिलहाल इस घटनाक्रम से पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश होती दिखाई दे रही है।
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