UK India relations : ब्रिटेन की एक संसदीय समिति ने गुरुवार को दमनकारी देशों की एक लिस्ट जारी की है, जिसमें भारत का नाम भी शामिल है। यह रिपोर्ट, जिसका शीर्षक है ‘ट्रांस नेशनल रिप्रेशन इन द यूके’, में कुल 12 देशों का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ विदेशी सरकारें ब्रिटेन में रहने वाले नागरिकों को डराने-धमकाने की कोशिश कर रही हैं और उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही हैं।
विदेशी सरकारों की गतिविधियों को मानवाधिकारों के लिए खतरा माना गया
इस रिपोर्ट में ब्रिटेन में रहने वाले नागरिकों को विदेशी सरकारों द्वारा निशाना बनाए जाने की घटनाओं में वृद्धि की बात कही गई है। रिपोर्ट में विशेष रूप से भारत के संदर्भ में आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) का नाम लिया गया है। यह संगठन खालिस्तान समर्थक है और भारत ने इसे गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत प्रतिबंधित किया हुआ है। जॉइंट कमेटी ऑन ह्यूमन राइट्स (JCHR) ने इस पर चिंता जताई है और ब्रिटिश सरकार से इन दबावों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
सिख फॉर जस्टिस और भारत के संदर्भ में रिपोर्ट का उल्लेख
रिपोर्ट में जिक्र किया गया है कि भारत जैसे देशों से जुड़े खालिस्तानी समर्थक संगठनों का यूके में प्रभाव बढ़ रहा है। ‘सिख फॉर जस्टिस’ संगठन द्वारा ब्रिटेन में रहने वाले भारतीयों के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं के बढ़ने की भी बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी सरकारें ब्रिटेन में रहने वाले लोगों को डराने और उनकी स्वतंत्रता को सीमित करने का प्रयास कर रही हैं, जो कि मानवाधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखा जा सकता है।
ब्रिटेन में बढ़ती दमनकारी गतिविधियाँ और MI5 की रिपोर्ट
ब्रिटेन की सुरक्षा एजेंसी MI5 द्वारा किए गए एक जांच में पाया गया कि 2022 के बाद से दमनकारी गतिविधियों में 48 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कुछ देशों द्वारा इंटरपोल के नियमों का गलत तरीके से उपयोग किया जा रहा है, जिससे लोगों के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाया जा रहा है। चीन, रूस और तुर्की को इस सूची में प्रमुख स्थान दिया गया है, लेकिन भारत और अन्य देशों पर भी ऐसे आरोप लगाए गए हैं, जो ब्रिटेन में रहने वाले लोगों के लिए एक चुनौती बन सकते हैं।
ब्रिटेन में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चिंता
ब्रिटेन की संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी है कि इन दबावों के कारण लोगों की बोलने और घूमने की आज़ादी पर गंभीर असर पड़ सकता है। समिति ने ब्रिटिश सरकार से अपील की है कि वह इस मुद्दे पर सख्त कदम उठाए ताकि इन मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोका जा सके और विदेशी दबावों से ब्रिटेन में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस रिपोर्ट के बाद भारत सहित अन्य देशों के खिलाफ ब्रिटेन में हो रही दमनकारी गतिविधियों पर नया विवाद खड़ा हो गया है, और यह अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में एक नई दिशा की ओर इशारा करता है।