Brazil President Lula : ब्राजील राष्ट्रपति लूला ने ट्रम्प के कॉल प्रस्ताव को ठुकराया, कहा- PM मोदी और शी जिनपिंग से करेंगे बात

Brazil President Lula :  अमेरिका और ब्राजील के बीच टैरिफ विवाद गहराता जा रहा है। इस बीच ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। ट्रम्प ने मंगलवार को बयान दिया था कि “लूला जब चाहें, मुझे कॉल कर सकते हैं।” इसके जवाब में लूला ने साफ तौर पर कहा कि वे ट्रम्प से बात करने के इच्छुक नहीं हैं, बल्कि वे इस मुद्दे पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से संपर्क करेंगे।

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लूला ने यह भी कहा कि अमेरिकी टैरिफ का सामना करने के लिए उनकी सरकार वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) का रुख करने पर विचार कर रही है। उन्होंने ट्रम्प के साथ सीधी बातचीत को टालते हुए कहा, “मैं ऐसे किसी नेता से बात करना चाहूंगा जो व्यापार, जलवायु और बहुपक्षीय सहयोग में गंभीरता दिखाए।”

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अमेरिका ने ब्राजील पर 50% टैरिफ लगाया

हाल ही में अमेरिका ने ब्राजील से आयात होने वाले तमाम उत्पादों पर 50% टैरिफ लगा दिया है। यह फैसला ट्रम्प प्रशासन द्वारा पूर्व राष्ट्रपति जाइर बोल्सोनारो के खिलाफ की जा रही कानूनी कार्रवाई को “राजनीतिक बदला” मानने के आधार पर लिया गया है। ट्रम्प ने इस कार्रवाई को “विचहंट” करार देते हुए कहा था कि बोल्सोनारो के साथ गलत हो रहा है और उन्हें चुनाव लड़ने से रोकना लोकतंत्र के खिलाफ है।

ट्रम्प की शर्तें: बोल्सोनारो पर लगे मुकदमे खत्म हों

ट्रम्प ने साफ तौर पर मांग की है कि बोल्सोनारो पर लगे मुकदमे खत्म किए जाएं, तभी ब्राजील पर से टैरिफ हटाने पर विचार किया जाएगा। सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रम्प ने लिखा, “बोल्सोनारो एक सम्मानित नेता हैं और उन पर लगाए गए मुकदमे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मनाक हैं।” साथ ही ट्रम्प ने ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट और मीडिया पर सेंसरशिप का भी आरोप लगाया।

COP-30 सम्मेलन में बुलावा भेजेंगे लूला

बातचीत से इनकार के बावजूद लूला ने यह जरूर कहा कि वे नवंबर में ब्राजील में होने वाले COP-30 क्लाइमेट समिट के लिए ट्रम्प को आमंत्रण भेजेंगे। उन्होंने कहा कि जलवायु संकट के मुद्दे पर सभी देशों को मिलकर काम करना चाहिए, भले ही उनके बीच राजनीतिक मतभेद क्यों न हों।

भारत और चीन से सहयोग की उम्मीद

लूला का यह बयान संकेत देता है कि ब्राजील अब व्यापारिक रणनीति के तहत अमेरिका के बजाय भारत और चीन जैसे देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में बढ़ सकता है। गौरतलब है कि भारत और ब्राजील के बीच बीते वर्षों में व्यापारिक संबंध मजबूत हुए हैं और दोनों देश BRICS समूह का हिस्सा भी हैं।

पृष्ठभूमि में क्या चल रहा है?

ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जाइर बोल्सोनारो पर 2022 में चुनाव हारने के बाद तख्तापलट की साजिश का आरोप है। 8 जनवरी 2023 को ब्रासीलिया में उनके समर्थकों ने संसद भवन और सुप्रीम कोर्ट पर हमला कर दिया था। इसके बाद उनके चुनाव लड़ने पर 2030 तक के लिए बैन लगा दिया गया।

ट्रम्प खुले तौर पर बोल्सोनारो के समर्थन में हैं और उन्हें “अमेरिका का मित्र” बताते हैं। वहीं, लूला सरकार बोल्सोनारो के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई को लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा मानती है।

ब्राजील और अमेरिका के बीच चल रहा टैरिफ विवाद अब केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और वैचारिक लड़ाई का रूप ले चुका है। राष्ट्रपति लूला के प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग से बातचीत की बात कहना इस मामले को वैश्विक मंच पर ले जाने का स्पष्ट संकेत है। COP-30 सम्मेलन इस तनाव के बीच एक संभावित राजनयिक मोर्चा बन सकता है, जहां दोनों देशों के रिश्तों में बदलाव की कोई नई पहल हो सकती है या तनाव और भी गहरा सकता है।

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