Chhattisgarh Tehsildar strike: छत्तीसगढ़ में पिछले 10 दिनों से हड़ताल पर बैठे तहसीलदारों ने आखिरकार अपनी हड़ताल वापस ले ली है। छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ की ओर से उठाई गई 17 सूत्रीय मांगों पर सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई। इस बीच, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के साथ संघ की अहम बैठक हुई जिसमें अधिकारियों को प्रमोशन, सुविधाएं और सुरक्षा से जुड़ी बड़ी रियायतें देने का आश्वासन मिला।

सरकारी गाड़ी, राजपत्रित दर्जा और निलंबन से सुरक्षा
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 50-50 फार्मूले के तहत तहसीलदारों को डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदोन्नति दी जाएगी। इसके साथ ही उन्हें राजपत्रित अधिकारी का दर्जा, सरकारी वाहन की सुविधा, और बिना जांच के निलंबन नहीं किए जाने की गारंटी भी मिलेगी। यह पहली बार है जब तहसीलदारों के लिए इतनी व्यापक प्रशासनिक सुविधाएं तय की गई हैं।

प्रशासनिक कार्य फिर से होंगे शुरू
हड़ताल के चलते प्रदेशभर में नामांतरण, सीमांकन और भू-अधिकार प्रमाण पत्र जैसे राजस्व कार्य ठप हो गए थे। अब हड़ताल के खत्म होने से इन लंबित कार्यों को फिर से शुरू किया जाएगा। राजस्व मंत्री वर्मा ने बैठक में कहा, “राजस्व विभाग शासन की रीढ़ है। अधिकारियों की समस्याएं प्राथमिकता पर हल की जाएंगी।”
संघ ने जताया सरकार पर भरोसा
संघ के प्रदेशाध्यक्ष कृष्ण कुमार लहरे, कार्यकारी अध्यक्ष विक्रांत सिंह राठौर, प्रदेश सचिव प्रशांत पटेल और प्रवक्ता शशिभूषण सोनी समेत अन्य पदाधिकारी बैठक में शामिल हुए। संघ ने सरकार की संवेदनशीलता और सकारात्मक पहल की सराहना करते हुए भरोसा जताया कि समयबद्ध कार्रवाई के जरिए सभी लंबित मुद्दों का समाधान होगा।
‘नारियल कलेक्शन’ की वायरल चैट ने डाली थी हड़ताल पर छाया
हड़ताल के दौरान एक और मामला चर्चा में रहा — तहसीलदारों के वायरल वॉट्सऐप चैट का, जिसे ‘50-50 ग्रुप’ कहा जा रहा था। इस चैट में ‘नारियल’ और ‘किलो’ जैसे कोड वर्ड के जरिए प्रमोशन के लिए कथित योगदान इकट्ठा करने की बात की गई थी। चैटिंग में कैबिनेट बैठक से पहले ‘नारियल’ पहुंचाने और प्रमोशन पक्का करने के प्रयासों का जिक्र था। यह मामला सोशल मीडिया और मीडिया में सवालों के घेरे में आ गया था।
तहसीलदारों की इस हड़ताल ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे को प्रभावित किया था, लेकिन सरकार और संघ के बीच संवाद और समन्वय से हल निकाला गया। इस घटनाक्रम से यह साबित हुआ कि समस्याओं का समाधान संस्थागत संवाद से संभव है – न कि टकराव से।










