सोनम वांगचुक और केंद्र सरकार के बीच हुए समझौते को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस की भूमिका को लेकर उठे सवालों के बीच संबंधित पक्षों के बयानों ने पूरे घटनाक्रम पर नई चर्चा छेड़ दी है।
सोनम वांगचुक और केंद्र सरकार के बीच हुए समझौते को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस की भूमिका को लेकर उठे सवालों के बीच संबंधित पक्षों के बयानों ने पूरे घटनाक्रम पर नई चर्चा छेड़ दी है।

प्रख्यात शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में अपनी 26 दिन लंबी भूख हड़ताल और उससे जुड़े घटनाक्रम पर विस्तार से बात की। यह भूख हड़ताल NEET पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के आंदोलन के दौरान हुई थी, जिसमें CJP के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र जुटे थे। आंदोलन उस समय और तेज हो गया था, जब दिल्ली पुलिस ने वांगचुक को जंतर-मंतर से अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई। इंटरव्यू में वांगचुक ने आंदोलन, सरकार के साथ बातचीत और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर अपनी राय साझा की।

द वीक को दिए इंटरव्यू में सोनम वांगचुक ने उन सभी दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार के दबाव या किसी राजनीतिक दल की मध्यस्थता के कारण उन्होंने अपनी भूख हड़ताल समाप्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी बातें पूरी तरह निराधार हैं। उनके अनुसार यदि किसी तरह का दबाव था, तो वह सरकार पर था, न कि उन पर। उन्होंने कहा कि आंदोलन के बढ़ने, अस्पताल ले जाए जाने और संसद मार्च के बाद सरकार पर जनदबाव बढ़ा, जिसके बाद संवाद की पहल हुई। वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से किसी भी राजनीतिक दल के जरिए बातचीत नहीं हुई।

वांगचुक ने बताया कि जब वे अस्पताल में भर्ती थे, तब उनके पास इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी सरकार का संदेश लेकर आते थे। उन्होंने कहा कि पहले सफदरजंग अस्पताल और बाद में मेदांता अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था के बीच आईबी अधिकारी बेहद शांत तरीके से उनसे पूछते थे कि क्या वे सरकार के प्रतिनिधियों से बातचीत करने को तैयार हैं। वांगचुक के अनुसार उन्होंने हमेशा कहा कि वे किसी भी पक्ष से बातचीत के लिए तैयार हैं। इसके बाद उन्हें बताया गया कि दो केंद्रीय मंत्री उनसे मिलने आने वाले हैं और उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि देश में सड़क और संसद के बीच अब भी संवाद का रिश्ता बना हुआ है। उनके अनुसार लोकतंत्र तभी मजबूत रहता है, जब जनता की आवाज सरकार तक पहुंचे और उस पर गंभीरता से विचार किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी बदलाव के लिए बड़े स्तर पर गुस्सा, लंबे आंदोलन या भारी जनहानि की जरूरत नहीं होनी चाहिए। सरकार को जनता की भावनाओं के प्रति अधिक संवेदनशील होना चाहिए, ताकि समस्याओं का समाधान समय रहते हो सके और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा बना रहे।
वांगचुक ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन की अहम भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर शहर में ऐसा निर्धारित स्थान होना चाहिए, जहां लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख सकें। उनके मुताबिक विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का ‘सेफ्टी वॉल्व’ होता है, जिसके जरिए सरकार जनता की भावनाओं और समस्याओं को समझ सकती है। यदि असहमति जताने के सभी रास्ते सीमित कर दिए जाएं, तो लोगों के भीतर असंतोष बढ़ता है और बाद में वही बड़े गुस्से का रूप ले सकता है। इसलिए लोकतंत्र में संवाद और शांतिपूर्ण विरोध दोनों के लिए पर्याप्त स्थान होना चाहिए।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर पूछे गए सवाल के जवाब में सोनम वांगचुक ने कहा कि किसी मंत्री का इस्तीफा केवल जवाबदेही स्वीकार करने की शुरुआत हो सकता है। उनका मानना है कि असली जरूरत पूरे शिक्षा तंत्र में व्यापक सुधार की है। उन्होंने कहा कि जैसे किसी मरीज के इलाज से पहले बीमारी को स्वीकार करना जरूरी होता है, उसी तरह शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं को स्वीकार करना भी आवश्यक है। केवल परीक्षा प्रणाली नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था में बदलाव होना चाहिए, जो भविष्य के नागरिक तैयार करती है।
वांगचुक ने परीक्षा प्रणाली को लेकर भी कई सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि यह समय है जब यह सोचा जाए कि क्या सभी छात्रों के लिए एक ही प्रश्नपत्र और एक जैसी मल्टीपल चॉइस परीक्षा सबसे बेहतर विकल्प है। उन्होंने सुझाव दिया कि समान कठिनाई स्तर वाले चार अलग-अलग प्रश्नपत्र तैयार किए जा सकते हैं, जिन्हें छात्रों को रैंडम तरीके से दिया जाए। उनका मानना है कि इससे पेपर लीक की संभावना काफी कम हो सकती है और परीक्षा प्रणाली अधिक सुरक्षित तथा पारदर्शी बन सकती है। उनके अनुसार शिक्षा व्यवस्था में तकनीकी और संरचनात्मक सुधार भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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