Janmashtami 2025 : भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हो गया है और साथ ही शुरू हो गई है भक्ति और उल्लास की वर्षा। जैसे ही घड़ी ने रात्रि के बारह बजाए, पूरे देश में, विशेष रूप से गोकुल और वृंदावन में, जय कन्हैया लाल की की गूंज आसमान तक पहुंच गई। मंदिरों में घंटे-घड़ियाल बजने लगे और भक्तों की आंखों से आनंदाश्रु बहने लगे।

इस्कॉन मंदिर में अभिषेक का पावन दृश्य
इस्कॉन मंदिरों में श्रीकृष्ण का अभिषेक पूरे विधि-विधान के साथ किया जा रहा है। दुग्ध, दही, शहद, घी और गंगाजल से भगवान का पवित्र स्नान कराया जा रहा है। शंखनाद और मृदंग की ताल पर भजन गाते भक्त भाव-विभोर हैं। पूरे मंदिर परिसर में फूलों की वर्षा और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का गायन हो रहा है।

घर-घर में श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी
सिर्फ मंदिर ही नहीं, बल्कि हर घर में भी भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। श्रद्धालुओं ने घरों में झूले सजाए हैं, लड्डू गोपाल को पालने में बिठाया गया है, और दूध-दही से अभिषेक किया जा रहा है। घरों से भी आरती, भजन और मंत्रोच्चार की ध्वनि गूंज रही है।
गोकुल-वृंदावन में आधी रात को मचा उल्लास
गोकुल और वृंदावन में यह रात दीपों और भक्ति की चमक से जगमगा उठी। मंदिरों को विद्युत सजावट और फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। जैसे ही श्रीकृष्ण के जन्म का समय हुआ, पूरा वातावरण हरि नाम संकीर्तन से भर उठा।
भक्ति में डूबा भारत, आसमान तक पहुंचे जयकारे
“जय कन्हैया लाल की”, “नंद के आनंद भयो” जैसे जयकारों से न केवल मंदिर और घर, बल्कि पूरा आसमान गुंजायमान हो गया। हर दिशा में ऐसा प्रतीत हुआ मानो भगवान स्वयं इस उत्सव का साक्षात रूप से आनंद ले रहे हों।

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