Ukraine conflict : रूस ने यूक्रेन के उन इलाकों में हमले तेज कर दिए हैं, जिन्हें पुतिन ने अपने नियंत्रण में लेने की शर्त रखी है। इसका मतलब है कि रूस जल्द से जल्द संपूर्ण कब्जा करना चाहता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पुतिन ने शांति वार्ता में इन इलाकों पर अपने अधिकार को स्वीकार करने के लिए पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से भी बात की। अलास्का वार्ता में पुतिन ने स्पष्ट किया कि वह युद्ध को रोकने के लिए स्थायी समाधान चाहते हैं। स्थायी समाधान का मतलब स्थायी समाधान का आशय रूस के लिए यह है कि यूक्रेन का वह हिस्सा उसे दे दिया जाए, जहां अभी लड़ाई जारी है। हालांकि यह इतना आसान नहीं दिख रहा। यूरोपीय देश लगातार यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी की मांग कर रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कई बार कहा है कि क्षेत्रीय अदला-बदली के बिना कोई समझौता नहीं होगा। रूस किन इलाकों पर कब्जा करना चाहता है रूस ने डोनेस्क के 88% हिस्से पर कब्जा कर लिया है, जहां 85% लोग रूसी भाषी हैं। लुहांस्क के 75% इलाके पर भी कब्जा है, जहां 80% लोग रूसी मूल के हैं। जेपोरिजिया का 74% हिस्सा, खेरसोन का 71%, सूमी का 68% और खारकीव का 50% हिस्सा रूस के नियंत्रण में है। इन इलाकों में रूसी भाषी आबादी ज्यादा होने के कारण रूस सबसे पहले इन्हीं क्षेत्रों पर कब्जा करना चाहता है। वाशिंगटन वार्ता का निष्कर्ष ट्रंप और यूरोपीय नेताओं के साथ वाशिंगटन में हुई बैठकों के बाद स्पष्ट हो गया कि पुतिन इन छह इलाकों को छोड़ने वाले नहीं हैं। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने ट्रंप से मुलाकात की है, लेकिन पुतिन की कोई शर्त नहीं मानी। यूरोपीय देश सुरक्षा गारंटी की मांग कर रहे हैं, लेकिन वास्तविक शक्ति रूस के पास है। इसका मतलब है कि भविष्य का कोई भी समझौता रूस की शर्तों पर होगा। रूस नहीं चाहता नाटो सैनिकों की मौजूदगी यूरोपीय नेता बार-बार सुरक्षा गारंटी की बात कर रहे हैं, जिसमें फ्रांस ने अपने सैनिक यूक्रेन में शांति सैनिकों की तरह तैनात करने का सुझाव दिया। रूस के दिमित्री मेदवेदेव ने इसे नासमझी करार दिया और साफ कहा कि नाटो सैनिकों को शांति सैनिक के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। पुतिन के करीबी और प्रतिबंध पुतिन के करीबी नेताओं पर कई तरह के अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हुए हैं। ट्रंप ने इन प्रतिबंधों को हटाने की कोशिश की थी, लेकिन इसके बदले में युद्ध विराम की शर्त लगाई गई थी। रूस फिलहाल युद्ध रोकने में कोई जल्दी नहीं दिखा रहा और अपने रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने पर केंद्रित है। Read More : Supreme Court का बड़ा फैसला: राज्यपाल बिना पुनर्विचार के बिल को रोक नहीं सकते, निर्वाचित सरकारों पर अधिकार नहीं














