Dowry Deaths in India: भारत जैसे विकासशील देश में जहां विज्ञान, शिक्षा और तकनीक नई ऊंचाइयों को छू रही है, वहीं दहेज प्रथा जैसी कुरीति आज भी महिलाओं के जीवन पर कहर बनकर टूट रही है। सरकारी कानून और जागरूकता अभियानों के बावजूद, दहेज उत्पीड़न और हत्याओं के मामलों में गिरावट के कोई ठोस संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। ग्रेटर नोएडा की निक्की भाटी हत्याकांड से देश फिर सन्न ताजा मामला ग्रेटर नोएडा का है, जहां 28 वर्षीय निक्की भाटी की 21 अगस्त 2025 को हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पति विपिन भाटी और सास दया भाटी ने मिलकर निक्की पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा दी। निक्की ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस क्रूरता भरे मामले ने फिर एक बार यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कानून के डर के बावजूद समाज में ऐसी बर्बरता क्यों जारी है? एनसीआरबी के आंकड़े: हर दिन 18 महिलाओं की मौत राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2022 की रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली है: भारत में 6,450 दहेज हत्या के मामले दर्ज हुए, यानी हर दिन औसतन 18 महिलाएं दहेज की बलि चढ़ रही हैं। इसके अलावा, 60,577 मामले अदालतों में लंबित हैं। सिर्फ 33% मामलों में दोषियों को सजा मिलती है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि कानून की मौजूदगी के बावजूद, पीड़ित महिलाओं को न्याय तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। घरेलू हिंसा के डरावने आँकड़े एक हालिया सर्वे के मुताबिक, 18 से 49 वर्ष की उम्र की 29% महिलाएं अपने पति से शारीरिक या यौन हिंसा का सामना कर चुकी हैं। 21.3% महिलाओं को चोट या कट की शिकायत मिली, 7.1% को जला देने जैसी गंभीर घटनाएं झेलनी पड़ीं, और 3.4% महिलाएं गंभीर रूप से जलकर प्रभावित हुईं। ये आँकड़े दहेज से जुड़ी हिंसा के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक प्रभावों को उजागर करते हैं। किन राज्यों में सबसे ज्यादा दहेज हत्या? उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश देश में दहेज हत्या के टॉप 3 राज्य हैं: उत्तर प्रदेश: 2,218 मामले बिहार: 1,057 मामले मध्य प्रदेश: 518 मामले इन आंकड़ों से साफ है कि उत्तर भारत में यह प्रथा अब भी गहराई से जड़ें जमाए हुए है। दहेज प्रथा केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि हजारों बेटियों की मौत का कारण बन चुकी है। निक्की भाटी जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि कानून बनाने से ज्यादा जरूरी है उनका प्रभावी क्रियान्वयन और समाज की सोच में बदलाव। जब तक हर नागरिक, हर परिवार और हर संस्था मिलकर दहेज के खिलाफ एकजुट नहीं होती, तब तक न तो कानून काम करेगा, न ही बेटियों की जिंदगी महफूज रहेगी। Read More : Brazil World Cup Team : नेमार की वापसी पर फिर लगी चोट की चोट, विनिसियस भी ब्राज़ील की विश्व कप क्वालीफायर टीम से बाहर














