CWG 2026: ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के जूडो खिलाड़ी हर्ष सिंह ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों के 60 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। दिल्ली के रहने वाले हर्ष सिंह ने फाइनल मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को एकतरफा अंदाज में हराकर देश का गौरव बढ़ाया। इस जीत के साथ वह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय जूडो के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है।

फाइनल में 10-0 से दर्ज की शानदार जीत
स्वर्ण पदक मुकाबले में हर्ष सिंह ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी जोशुआ कैट्ज को कोई बड़ा मौका नहीं दिया और पूरे मुकाबले पर अपना नियंत्रण बनाए रखा। हर्ष ने तकनीकी रूप से बेहद प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए मुकाबला 10-0 के बड़े अंतर से अपने नाम किया। उन्होंने यह जीत वाजा-आरी (Waza-ari) के दम पर हासिल की। उनकी बेहतरीन रणनीति, आत्मविश्वास और तकनीकी कौशल ने उन्हें आसानी से स्वर्ण पदक तक पहुंचा दिया।

कॉमनवेल्थ इतिहास में पहली बार भारतीय पुरुष जूडो खिलाड़ी बना चैंपियन
हर्ष सिंह की जीत भारतीय खेल इतिहास के लिए बेहद खास मानी जा रही है। वह राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले किसी भी भारतीय पुरुष जूडो खिलाड़ी ने यह उपलब्धि हासिल नहीं की थी। उनकी इस सफलता ने न केवल भारतीय जूडो को नई पहचान दी है, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का नया स्रोत तैयार किया है।
60 किलोग्राम वर्ग में ऐसा रहा पदक वितरण
पुरुषों के 60 किलोग्राम भारवर्ग में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। वहीं इस स्पर्धा के दोनों कांस्य पदक क्रमशः इंग्लैंड के चार्ली अयारे और ऑस्ट्रेलिया के पेद्रो कार्लोस एंटुन नेटो ने अपने नाम किए। इस वर्ग में भारत का स्वर्ण पदक जीतना प्रतियोगिता की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
जूडो में भारत का दूसरा स्वर्ण पदक
हर्ष सिंह की सफलता के साथ ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने जूडो में अपना दूसरा स्वर्ण पदक हासिल कर लिया। इससे पहले भारत की महिला जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम भारवर्ग में गोल्ड जीतकर इतिहास रचा था। वह राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो का स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी थीं। अब हर्ष सिंह ने भी इस सूची में अपना नाम जोड़ते हुए भारतीय जूडो को दोहरी खुशी दी है।
अस्मिता डे ने भी रचा था इतिहास
अस्मिता डे ने अपने फाइनल मुकाबले में कनाडा की हैदी क्वाश को हराया था। निर्धारित समय तक मुकाबला बराबरी पर रहने के बाद निर्णय गोल्डन स्कोर के जरिए हुआ, जहां अस्मिता ने निर्णायक अंक हासिल कर स्वर्ण पदक जीत लिया। उनकी ऐतिहासिक जीत के बाद अब हर्ष सिंह ने भी स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय जूडो की उपलब्धियों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
भारत को मिला ग्लास्गो का पांचवां स्वर्ण
हर्ष सिंह का स्वर्ण पदक ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत का पांचवां गोल्ड मेडल है। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों के लगातार शानदार प्रदर्शन का असर पदक तालिका में भी देखने को मिला है। हर्ष की जीत ने भारत को तालिका में एक स्थान ऊपर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
पदक तालिका में भारत ने लगाई छलांग
ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में अब तक भारत ने 5 स्वर्ण, 10 रजत और 4 कांस्य पदक जीत लिए हैं। इस प्रदर्शन के दम पर भारतीय दल पदक तालिका में आठवें स्थान पर पहुंच गया है। हर्ष सिंह के स्वर्ण पदक के बाद भारत ने न्यूजीलैंड को पीछे छोड़ते हुए अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। प्रतियोगिता के आगामी मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों से पदकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
भारतीय जूडो के लिए नया सुनहरा दौर
हर्ष सिंह और अस्मिता डे की लगातार ऐतिहासिक सफलताओं ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय जूडो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियां देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव मिलता रहा, तो आने वाले वर्षों में भारत जूडो में भी दुनिया की मजबूत ताकतों में शामिल हो सकता है।
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