SpaceX Launch: स्पेसएक्स का इतिहास रचने वाला मिशन, स्टारशिप का 10वां टेस्ट लॉन्च सफल, आठ सैटेलाइट सिम्युलेटर किए डिप्लॉय

SpaceX Launch: दुनिया के सबसे ताकतवर और सबसे बड़े रॉकेट स्टारशिप का 10वां सफल टेस्ट बुधवार सुबह 5:00 बजे अमेरिका के टेक्सास स्थित बोका चिका लॉन्च साइट से किया गया। स्पेसएक्स द्वारा विकसित यह टेस्ट मिशन करीब 1 घंटे 6 मिनट तक चला और इसमें सभी प्रमुख ऑब्जेक्टिव पूरे किए गए।

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स्टारशिप टेस्ट का उद्देश्य

इस मिशन का मकसद था –

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सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट क्षमताओं की जांच

इंजन रिस्टार्ट टेस्ट

बूस्टर और स्पेसक्राफ्ट की वॉटर लैंडिंग

नए इंजन कॉन्फिगरेशन का परीक्षण

जरूरी डाटा जुटाना ताकि भविष्य के इंटरप्लैनेटरी मिशनों को बेहतर किया जा सके

स्टारशिप के ऊपरी हिस्से की कंट्रोल्ड वॉटर लैंडिंग हिंद महासागर (Indian Ocean) में कराई गई, जबकि सुपर हेवी बूस्टर ने सफलतापूर्वक अमेरिका की खाड़ी (Gulf of Mexico) में पानी में लैंड किया।

क्या हैं स्टारलिंक सिम्युलेटर?

मिशन के दौरान 8 स्टारलिंक सिम्युलेटर सैटेलाइट अंतरिक्ष में डिप्लॉय किए गए। ये असली स्टारलिंक सैटेलाइट्स के डमी संस्करण हैं और इनका उद्देश्य स्टारशिप की सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट प्रक्रिया को परखना था। ये सबऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी पर रहेंगे और रीएंट्री के समय नष्ट हो जाने की संभावना है।

मिशन के हाईलाइट्स

स्टेज सेपरेशन के बाद बूस्टर ने फ्लिप करके बूस्टबैक बर्न किया

लैंडिंग बर्न के दौरान 3 सेंटर इंजनों में से एक को जानबूझकर बंद किया गया

इसका मकसद था जांचना कि बैकअप इंजन से लैंडिंग संभव है या नहीं

अंतरिक्ष में रैप्टर इंजन को दोबारा चालू किया गया, जो भविष्य के इंटरप्लैनेटरी मिशनों के लिए बेहद अहम टेस्ट है

पूरी तरह से रीयूजेबल रॉकेट

स्पेसएक्स की यह स्टारशिप 403 फीट ऊंचा है और इसे पूरी तरह से रीयूजेबल बनाया गया है। इसमें दो प्रमुख हिस्से हैं:

स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट (ऊपरी हिस्सा)

सुपर हेवी बूस्टर (निचला हिस्सा)
ये दोनों मिलकर इस वाहन को दुनिया का सबसे पावरफुल लॉन्च सिस्टम बनाते हैं।

पिछला फेल टेस्ट: 29 जून 2025

इससे पहले 29 जून को जब स्टारशिप का स्टैटिक फायर टेस्ट हो रहा था, तब रॉकेट के ऊपरी हिस्से में ब्लास्ट हो गया था। पूरा रॉकेट कुछ ही सेकंड्स में आग के गोले में तब्दील हो गया था। उसके बाद से यह टेस्ट काफी अहम माना जा रहा था।

इलॉन मस्क की अगुआई वाली स्पेसएक्स ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह भविष्य की स्पेस टेक्नोलॉजी में सबसे आगे है। स्टारशिप का यह सफल टेस्ट न केवल कंपनी के लिए बल्कि मानव जाति के भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक बड़ा कदम है।

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