Cancer Awareness : पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा जगत ने एक चिंताजनक प्रवृत्ति देखी है। पहले कैंसर को मुख्य रूप से ढलती उम्र की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब 30 से 40 वर्ष के युवाओं में इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ‘नेचर’ जर्नल में प्रकाशित एक हालिया शोध ने इस पहेली को सुलझाने का प्रयास किया है। शोध के अनुसार, वर्तमान युवा पीढ़ी का शरीर अपनी वास्तविक आयु की तुलना में तेजी से ‘जैविक रूप से बूढ़ा’ (Biological Aging) हो रहा है। यही असामयिक जैविक परिवर्तन कम उम्र में कैंसर जैसी घातक बीमारियों को न्योता दे रहे हैं।

जैविक उम्र और वास्तविक आयु का घातक अंतर
प्रख्यात कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अफशीन एमरानी के अनुसार, अब स्वास्थ्य का आकलन केवल जन्मतिथि से नहीं, बल्कि शरीर की आंतरिक स्थिति से होता है। आपकी शारीरिक जैविक उम्र और वास्तविक उम्र के बीच का अंतर ही आपकी स्वास्थ्य स्थिति निर्धारित करता है। यूके बायोबैंक के 1.54 लाख लोगों और ‘ऑल ऑफ अस’ रिसर्च प्रोग्राम के 10 हजार प्रतिभागियों के डेटा के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ कि 1965 से 1990 के बीच जन्मे लोगों में जैविक रूप से बूढ़े होने की दर 1950 के दशक के मुकाबले काफी तीव्र है। यह शोध बताता है कि नई पीढ़ी में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया अनियंत्रित हो चुकी है।

अंगों और कोशिकाओं पर पड़ता प्रतिकूल प्रभाव
शोध के निष्कर्ष चौंकाने वाले हैं। यदि किसी व्यक्ति की जैविक उम्र उसकी वास्तविक उम्र से अधिक है, तो कैंसर का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) समय से पहले बूढ़ी हो गई थी, उनमें फेफड़ों के कैंसर का खतरा अधिक देखा गया। इसी तरह, जिनके वसा ऊतकों (Fat Tissues) की उम्र तेजी से बढ़ रही थी, उन्हें कोलोरेक्टल कैंसर होने की संभावना अधिक रही। कोशिकाओं के भीतर डीएनए का क्षतिग्रस्त होना उम्र बढ़ने की सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन युवाओं में यह गिरावट बेहद असामान्य है।
जीवनशैली और पर्यावरण का हानिकारक प्रभाव
असमय बुढ़ापे और कैंसर के बढ़ते मामलों के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं। इनमें मुख्य रूप से असंतुलित खान-पान, मोटापा, बढ़ता प्रदूषण, धूम्रपान, शारीरिक निष्क्रियता और नींद की कमी प्रमुख हैं। जब शरीर की कोशिकाएं लगातार इन तनावपूर्ण कारकों से जूझती हैं, तो डीएनए की मरम्मत करने की प्राकृतिक क्षमता कम हो जाती है, जिससे शरीर समय से पहले बूढ़ा होने लगता है। आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़ ने शरीर के आंतरिक अंगों पर अनावश्यक दबाव डाला है, जो कैंसर की कोशिकाओं को पनपने में मदद करता है।
जैविक उम्र को थामने के उपाय
हालांकि यह स्थिति गंभीर है, लेकिन राहत की बात यह है कि जैविक उम्र बढ़ने की रफ्तार को जीवनशैली में बदलाव के जरिए धीमा किया जा सकता है। विशेषज्ञ नियमित व्यायाम, पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार, स्वस्थ वजन का प्रबंधन, पर्याप्त नींद और हानिकारक आदतों जैसे धूम्रपान से दूरी बनाने की सलाह देते हैं। शोधकर्ताओं का यह भी मानना है कि यदि अधिक जोखिम वाले युवाओं की पहचान समय रहते कर ली जाए, तो नियमित जांच और उचित जीवनशैली के माध्यम से कैंसर के खतरे को न केवल कम किया जा सकता है, बल्कि एक स्वस्थ जीवन भी सुनिश्चित किया जा सकता है।











