Trump China warning : अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर चरम पर है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जरूरत पड़ी, तो वे चीनी उत्पादों पर 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकते हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और चीन के बीच 90 दिनों की ट्रेड वॉर संधि चल रही है।

बोइंग पार्ट्स पर रोक, 200 विमान खड़े
ट्रंप ने दावा किया कि चीन के करीब 200 विमान उड़ान नहीं भर पा रहे हैं, क्योंकि अमेरिका ने जानबूझकर बोइंग के पुर्जों (Parts) की सप्लाई रोक दी है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन में फिलहाल बोइंग के साथ 500 विमानों का सौदा चल रहा है, जो अमेरिका की एयरोस्पेस इंडस्ट्री की ताकत को दर्शाता है।

भारत पर 25% टैरिफ लागू
इस बीच ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25 प्रतिशत पेनल्टी टैरिफ लागू कर दिया है, जो 27 अगस्त की सुबह से प्रभावी हो गया। यह टैरिफ अमेरिका में भारत से आयातित कुछ खास उत्पादों पर लगाया गया है।
बीजिंग को “बर्बाद” करने की धमकी
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और चीन बेहतर रिश्ते बना सकते हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने चेताया कि “अगर जरूरत पड़ी तो बीजिंग को बर्बाद किया जा सकता है।” उन्होंने बीजिंग की रेयर अर्थ पॉलिसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर चीन ने अमेरिका को जरूरी खनिज जैसे मैग्नेट की सप्लाई रोक दी, तो वे 200% तक का टैरिफ लगाने में पीछे नहीं हटेंगे।
ट्रंप का बड़ा दावा और रणनीति
ट्रंप ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्योंग के साथ द्विपक्षीय बैठक से पहले यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की स्थिति चीन से बेहतर है और वे जल्द ही चीन की यात्रा कर सकते हैं। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि हाल ही में उनकी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत हुई है।
फिलहाल 90 दिनों का विराम
गौरतलब है कि इस साल अप्रैल में ट्रंप द्वारा वैश्विक टैरिफ का ऐलान किए जाने के बाद चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी, जिससे ट्रेड वॉर की शुरुआत हुई। लेकिन 12 अगस्त को दोनों देशों ने 90 दिनों के लिए मौजूदा व्यापारिक स्थिति को बनाए रखने पर सहमति जताई है। इससे पहले चीन पर टैरिफ 145% तक पहुंच चुका था, जिसे फिलहाल घटाकर 30% कर दिया गया है।
ट्रंप की चेतावनी और बोइंग पार्ट्स की रोक ने अमेरिका-चीन व्यापारिक रिश्तों में फिर से तल्खी ला दी है। आने वाले समय में अगर चीन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आती है तो यह वैश्विक सप्लाई चेन और एयरोस्पेस सेक्टर पर बड़ा असर डाल सकती है।










