Shaniwar vrat vidhi : शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव को समर्पित होता है। कर्मफल दाता शनि देव प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि साढ़ेसाती, शनि की ढैय्या या शनि दोष का प्रभाव चल रहा हो, तो शनिवार का व्रत और विशेष पूजन करने से शनि देव की कृपा प्राप्त की जा सकती है। शनि देव की कृपा क्यों है जरूरी? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि शनि शुभ स्थान पर हैं तो व्यक्ति को मान-सम्मान, सफलता और स्थिरता प्राप्त होती है। लेकिन शनि के अशुभ प्रभाव से जीवन में बाधाएं, आर्थिक संकट, मानसिक तनाव और कार्य में विफलता आने लगती है। ऐसे में शनिवार के दिन व्रत और शनि पूजा करने से शनि के दुष्प्रभाव को शांत किया जा सकता है। शनिवार व्रत की संपूर्ण विधि प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें – पहली बार व्रत करने वाले 7, 11 या 21 शनिवार तक व्रत का संकल्प लें। नीले या काले वस्त्र पहनें – यह रंग शनि देव का प्रिय माना जाता है। पीपल वृक्ष की पूजा करें – पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाएं और शाम को दीपक जलाएं। शनि मंदिर जाएं – मंदिर जाकर शनि देव को सरसों का तेल, काले तिल, उड़द की दाल और काला कपड़ा अर्पित करें। सरसों के तेल का दीपक जलाएं – दीपक में काले तिल और उड़द डालकर शनि देव के समक्ष जलाएं। शनि मंत्र और चालीसा का पाठ करें – शनि मंत्र: “ॐ शं शनैश्चराय नमः” शनि चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करें। शनि देव की पूजा मंदिर में ही करें – घर में शनि देव की मूर्ति या चित्र स्थापित करना उचित नहीं माना जाता। शनिवार व्रत से क्या लाभ मिलते हैं? शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में कमी आती है जीवन में आने वाली रुकावटें और आर्थिक तंगी दूर होती है कोर्ट-कचहरी, मुकदमे और शत्रु बाधा से राहत मिलती है मन को शांति और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है शनिवार का व्रत और शनि देव की आराधना न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि ज्योतिषीय प्रभावों को शांत करने के लिए भी अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। नियमित रूप से व्रत रखकर और श्रद्धा भाव से शनि पूजा करने से शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। Read More : Raipur Railway Crossing: रायपुर के कोटा रेलवे क्रॉसिंग को बंद करने का काम शुरू, विकल्प न मिलने से जनजीवन प्रभावित














