Hemchand Yadav University : छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप की पदस्थापना को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद जब भूपेंद्र कुलदीप 9 अक्टूबर 2026 को विश्वविद्यालय में पदभार ग्रहण करने पहुंचे, तो उनके चेंबर में ताला लगा मिला। आदेश की प्रति संबंधित विभाग को सौंपने के बावजूद वे अपने कार्यालय में प्रवेश नहीं कर सके। इस घटनाक्रम के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
हाईकोर्ट ने अटैचमेंट का सरकारी आदेश किया निरस्त
मामले की शुरुआत 29 सितंबर 2026 को जारी उच्च शिक्षा विभाग के आदेश से हुई थी। इस आदेश के तहत भूपेंद्र कुलदीप को हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से हटाकर उच्च शिक्षा संचालनालय, रायपुर में अटैच कर दिया गया था। उनकी जगह दुर्ग साइंस कॉलेज के इतिहास विभाग में कार्यरत प्राध्यापक डॉ. अनिल कुमार पांडेय को प्रभारी कुलसचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। कुलदीप ने सरकारी आदेश को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सेवा नियमों को लेकर अदालत ने उठाए सवाल
याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विभु दत्त गुरु की एकल पीठ ने राज्य सरकार का 29 सितंबर का आदेश निरस्त कर दिया। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या लागू सेवा नियमों के तहत विश्वविद्यालय के कुलसचिव को उच्च शिक्षा संचालनालय जैसे सरकारी विभाग में अटैच किया जा सकता है। अदालत ने पाया कि सरकार ऐसा स्पष्ट वैधानिक प्रावधान नहीं बता सकी, जिसके आधार पर इस तरह की कार्रवाई को उचित ठहराया जा सके।
सरकार की दलीलों को आदेश बचाने के लिए पर्याप्त नहीं माना
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि वर्ष 1999 में नियमों में संशोधन के बाद कुलसचिव के स्थानांतरण का अधिकार राज्य सरकार को प्राप्त है। सरकार ने यह भी दलील दी कि भूपेंद्र कुलदीप के खिलाफ विभागीय जांच लंबित है और इसी कारण उन्हें उच्च शिक्षा संचालनालय में अटैच किया गया था।
हालांकि, अदालत ने इन तर्कों को विवादित आदेश को कायम रखने के लिए पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट के अनुसार, स्थानांतरण का अधिकार होने का अर्थ यह नहीं है कि सरकार लागू नियमों से बाहर जाकर कोई कार्रवाई कर सकती है। विभागीय जांच लंबित होना भी अपने आप में नियमों से परे आदेश जारी करने का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए आदेश रद्द कर दिया, हालांकि सरकार को कानून और लागू नियमों के अनुसार नया आदेश जारी करने की छूट दी।
आदेश की प्रति देने के बाद भी नहीं मिला चेंबर
हाईकोर्ट के फैसले के अगले दिन, 9 अक्टूबर को भूपेंद्र कुलदीप विश्वविद्यालय पहुंचे। उन्होंने संबंधित विभाग में अदालत के आदेश की प्रति सौंपी, लेकिन इसके बाद भी वे अपने चेंबर में प्रवेश नहीं कर पाए। बताया गया कि इस दौरान वे कभी दूसरे कमरे में बैठे तो कभी परिसर में घूमते नजर आए। जानकारी के मुताबिक, कुलपति प्रो. संजय तिवारी उस समय विश्वविद्यालय में मौजूद नहीं थे। प्रभारी कुलसचिव डॉ. अनिल पांडेय के भी छुट्टी पर होने की बात सामने आई। हालांकि, चेंबर में ताला लगे होने के कारणों पर विश्वविद्यालय प्रशासन का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सोमवार को अवमानना याचिका दायर करने की चेतावनी
भूपेंद्र कुलदीप के अधिवक्ता शशिकांत चौहान ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा अटैचमेंट आदेश रद्द किए जाने के बाद पदभार ग्रहण करने से रोकने का मामला अदालत के आदेश की अवहेलना से जुड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कुलदीप को कार्यालय में प्रवेश देकर पदभार ग्रहण करने का अवसर नहीं दिया गया, तो सोमवार को हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की जा सकती है।
अब विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर नजर
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर हेमचंद यादव विश्वविद्यालय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए चेंबर बंद होने के कारण और कुलदीप को पदभार ग्रहण करने से रोकने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन हाईकोर्ट के फैसले के बाद क्या कदम उठाता है और क्या यह विवाद अवमानना याचिका के जरिए दोबारा अदालत तक पहुंचता है।
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