Naxals vs Education: बस्तर में शिक्षा दूतों की हत्या पर सुकमा पुलिस का कड़ा संदेश, नक्सलियों की सबसे बड़ी दुश्मन है किताब

Naxals vs Education: बस्तर क्षेत्र में लगातार हो रही शिक्षा दूतों की हत्या ने क्षेत्र में सुरक्षा और शिक्षा के संकट को गहरा दिया है। इन घटनाओं के बीच सुकमा पुलिस ने नक्सलवाद के असली चेहरे को उजागर करते हुए एक प्रभावशाली मीम जारी किया है, जो साफ तौर पर बताता है कि नक्सली शिक्षा दूतों को क्यों निशाना बना रहे हैं।

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नक्सलियों का असली मकसद: शिक्षा को रोकना

सुकमा पुलिस ने अपने संदेश में स्पष्ट किया है कि नक्सलियों का उद्देश्य आदिवासी बच्चों की शिक्षा में बाधा डालना और उन्हें अंधकार में धकेलना है। नक्सली जानते हैं कि शिक्षा से ही आदिवासी समाज में जागरूकता आएगी, जिससे उनका नक्सलवाद खत्म हो सकता है। इसलिए वे किताब को अपनी सबसे बड़ी दुश्मन मानते हैं, न कि बंदूक को।

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एसपी किरण चव्हाण का संदेश

सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने कहा है, “जहां शिक्षा रुकती है, वहीं विकास रुक जाता है और यही अंधकार नक्सलियों को चाहिए। उनका सबसे बड़ा डर यही है कि आदिवासी बच्चे पढ़-लिख जाएंगे और फिर वे नक्सलवाद की राह नहीं चुनेंगे। अशिक्षा नक्सलियों का हथियार है, और शिक्षा ही उसका अंत करेगी।”

उन्होंने जनता से अपील की कि नक्सलियों की इस मानसिकता का डटकर विरोध करें और अपने बच्चों को पढ़ाई से कभी दूर न रखें। शिक्षा दूतों की हत्या से सिर्फ शिक्षक नहीं, बल्कि पूरे समाज का विकास रुक जाता है। एसपी ने कहा कि अब समय आ गया है कि लोग खुलकर नक्सलियों का विरोध करें और बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करें।

शिक्षा दूत क्यों हैं निशाने पर?

बीते कुछ वर्षों में नक्सलियों ने बीजापुर और सुकमा जिलों में कम से कम 9 शिक्षा दूतों की हत्या कर दी है। इनमें बीजापुर में 5 और सुकमा में 4 शिक्षा दूत शामिल हैं। हाल ही में बीजापुर के गंगालूर में शिक्षा दूत कल्लू ताती और सुकमा के सिलगेर में शिक्षा दूत लक्ष्मण बारसे की निर्मम हत्या हुई।

नक्सलियों द्वारा स्कूलों को बंद करवाने और शिक्षा दूतों की तैनाती का विरोध लगातार जारी है। उनका दावा है कि स्कूल खोलना सरकार का एजेंडा है, लेकिन हकीकत यह है कि स्कूल खुलने से आदिवासी क्षेत्रों की नई पीढ़ी शिक्षा की ओर लौट रही है, जो नक्सलियों के लिए बर्दाश्त से बाहर है।

शिक्षा ही नक्सलवाद का खात्मा है

सुकमा पुलिस के इस संदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि शिक्षा को लेकर नक्सलियों की कट्टर मानसिकता को समझना और उसके खिलाफ जागरूक होना बेहद जरूरी है। शिक्षा दूतों की हत्याएं केवल शिक्षकों के लिए नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज के लिए बड़ा खतरा हैं।

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद की समस्या को समाप्त करने के लिए शिक्षा को बढ़ावा देना आवश्यक है। नक्सलियों की हरकतों के बीच पुलिस प्रशासन ने शिक्षा को नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार माना है। जनता से अपील है कि वे नक्सलियों की इस मानसिकता का विरोध करें और बच्चों को पढ़ाई के रास्ते से कभी न हटकाएं।

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