Gangster Shabbir Alam : झारखंड के वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर शब्बीर उर्फ साबिर आलम, उसके बेटे कामरान और अन्य सहयोगियों के खिलाफ अंबिकापुर कोतवाली पुलिस ने एक और एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने शहर के खरसिया नाका निवासी एक व्यवसायी पर पहले से दर्ज मामलों को वापस लेने का दबाव बनाया और ऐसा नहीं करने पर जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

13 वर्षों से अंबिकापुर में छिपा था गैंगस्टर
पुलिस जांच के अनुसार, झारखंड का फरार गैंगस्टर शब्बीर आलम पिछले करीब 13 वर्षों से अंबिकापुर में पहचान छिपाकर रह रहा था। इस दौरान उसने करोड़ों रुपये की संपत्ति और कारोबार खड़ा कर लिया था। हाल ही में झारखंड पुलिस उसे गिरफ्तार करने अंबिकापुर पहुंची थी, लेकिन कार्रवाई के दौरान उसके सहयोगियों ने उसे पुलिस की गिरफ्त से भागने में मदद कर दी। तब से वह फरार चल रहा है और उसकी तलाश लगातार जारी है।

व्यवसायी ने लगाए गंभीर आरोप
खरसिया नाका निवासी व्यवसायी अबू मोहम्मद ने कोतवाली थाने में दर्ज शिकायत में बताया कि उनका कामरान आलम, शब्बीर आलम और जिशान आलम के साथ विवाद चल रहा है। इसी विवाद के संबंध में उन्होंने पहले भी दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई थीं। उनका आरोप है कि इन मामलों को वापस लेने के लिए लगातार उन पर दबाव बनाया गया और उन्हें कई बार धमकाया गया।
तीन अलग-अलग तारीखों पर दी गई धमकी
शिकायतकर्ता के अनुसार, 3 जनवरी, 4 जनवरी और 17 मार्च 2026 को कामरान आलम, शब्बीर आलम, इरशाद आलम, जिशान आलम, दिलशाद आलम, सलमान, मोहम्मद साद, खुशबास तथा नौशाद सहित अन्य लोगों ने अलग-अलग स्थानों पर उन्हें रोककर एफआईआर वापस लेने के लिए धमकाया। शिकायत में कहा गया है कि आरोपियों ने जान से मारने की चेतावनी भी दी, जिससे पूरा परिवार भय के माहौल में जी रहा है।
BNS की धाराओं में मामला दर्ज
व्यवसायी की शिकायत के आधार पर कोतवाली पुलिस ने शब्बीर आलम, उसके बेटे कामरान और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296(बी), 351(3) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि शिकायतकर्ता के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी कई मामलों में दर्ज हो चुकी हैं एफआईआर
शब्बीर आलम का नाम पहले से कई गंभीर आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है। दोहरे हत्याकांड में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। वर्ष 2013 में हाईकोर्ट में पेशी के दौरान वह फरार हो गया था, जिसके बाद धनबाद पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित कर उसकी तलाश शुरू कर दी थी। हाल ही में झारखंड पुलिस की कार्रवाई के दौरान भी वह गिरफ्तारी से बच निकला।
गैंगस्टर को भगाने के मामले में भी कार्रवाई
झारखंड पुलिस की शिकायत पर सरगुजा पुलिस पहले ही शब्बीर आलम को फरार कराने के मामले में उसके बेटे कामरान, मोहम्मद जाहिद, जुनैद खान और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर चुकी है। इस मामले में मोहम्मद जाहिद और जुनैद खान को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं।
आर्थिक नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
पुलिस अब शब्बीर आलम के आर्थिक नेटवर्क और उसके कथित निवेशों की भी जांच कर रही है। जांच में यह देखा जा रहा है कि पिछले कई वर्षों में उसके कारोबार और संपत्तियों में किस-किस का सहयोग रहा। राजहंस बस और एम्बुलेंस कारोबार में निवेश के आरोप भी सामने आए थे, हालांकि संबंधित संचालकों ने इन आरोपों से इनकार करते हुए अपने सभी दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए हैं। अब तक की जांच में इन कारोबारों में शब्बीर आलम के निवेश की पुष्टि नहीं हुई है।
जमीन और अन्य कारोबार भी जांच के दायरे में
पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि शब्बीर आलम और उसके परिवार के कुछ स्थानीय कारोबारियों से व्यावसायिक संबंध रहे हैं। इसके अलावा जमीन के कारोबार में बड़े निवेश की भी जांच की जा रही है। सरगुजा पुलिस का कहना है कि आर्थिक लेन-देन, संपत्ति और संभावित सहयोगियों से जुड़े सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जाएगी।
आर्थिक जांच की उठी मांग
इस पूरे मामले के बाद भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने गैंगस्टर के आर्थिक नेटवर्क की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों तक अंबिकापुर में छिपकर रहने और कारोबार खड़ा करने की घटना कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने मांग की कि एसआईटी या आर्थिक अपराध अन्वेषण एजेंसी से पूरे वित्तीय नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अपराध से अर्जित धन का इस्तेमाल किन-किन क्षेत्रों में किया गया।











