CGMSC Reagent Scam: ED ने मोक्षित कॉर्पोरेशन की पोर्शे और मर्सिडीज जब्त की, गिर सकती है गाज

CGMSC Reagent Scam: छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित CGMSC रिएजेंट घोटाले की जांच में तेजी लाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। मोक्षित कॉर्पोरेशन के नाम पर दर्ज पोर्शे केयेन कूप और मर्सिडीज-बेंज जैसी दो लग्जरी गाड़ियों को जब्त कर लिया गया है। यह फर्म शशांक चोपड़ा और उनके पिता शांतिलाल चोपड़ा की साझेदारी में संचालित होती है।

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ईडी की यह कार्रवाई 28 अगस्त को दुर्ग में हुई छापेमारी के बाद सामने आई है, जिसमें शशांक चोपड़ा और अन्य आरोपियों के ठिकानों की तलाशी ली गई थी। छापे में घोटाले से जुड़े दस्तावेज और अन्य सबूत मिले, जिसके बाद यह जब्ती की गई।

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ACB-EOW की FIR के आधार पर जांच

यह मामला एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज की गई FIR के आधार पर शुरू हुआ था। FIR में मोक्षित कॉर्पोरेशन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) और डायरेक्टरेट ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DHS) के अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है। आरोपियों पर आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार और सरकारी धन की हेराफेरी का आरोप है। एसीबी-ईओडब्ल्यू इस मामले में पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिससे जांच की दिशा और भी स्पष्ट हो गई है।

टेंडर प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा और सरकारी नुकसान

चार्जशीट के अनुसार, शशांक चोपड़ा और संबंधित अधिकारियों ने मिलकर टेंडर प्रक्रिया में जमकर हेरफेर की। फर्जी डिमांड तैयार कर मेडिकल उपकरण और रिएजेंट्स की खरीद-फरोख्त की गई। इसमें सप्लाई की दरें बाजार मूल्य से काफी ज्यादा थीं, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ और आरोपियों ने निजी लाभ उठाया।

पहले भी हुई थी 40 करोड़ की संपत्ति जब्त

इससे पहले 30 जुलाई 2025 को ईडी ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 40 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त और फ्रीज की थी। उस वक्त भी दो लग्जरी वाहन – मिनी कूपर और टोयोटा फॉर्च्यूनर जब्त किए गए थे। इससे स्पष्ट होता है कि आरोपी बड़े पैमाने पर अवैध रूप से कमाई गई राशि का इस्तेमाल भौतिक संपत्तियां और लग्जरी जीवनशैली अपनाने में कर रहे थे।

हेल्थ सर्विसेज अधिकारियों पर भी एजेंसी की नजर

ईडी सूत्रों के मुताबिक, जांच का अगला चरण स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की ओर बढ़ रहा है। जल्द ही DHS और CGMSCL के उच्च पदस्थ अफसरों पर भी शिकंजा कस सकता है। इस घोटाले की परतें खुलने के साथ ही राज्य के स्वास्थ्य तंत्र में भ्रष्टाचार की गहराई सामने आ रही है।

CGMSC घोटाला अब सिर्फ एक कॉर्पोरेट घोटाला नहीं रहा, बल्कि इसमें सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का बड़ा मामला बन चुका है। ईडी की सख्त कार्रवाई से यह साफ है कि जांच आगे भी तेज़ होगी और आने वाले दिनों में और बड़ी जब्तियां व गिरफ्तारियां संभव हैं।

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