Vice Presidential Election 2025: देश के राजनीतिक गलियारों में 9 सितंबर को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव की चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में जगदीप धनखड़ के इस्तीफे ने इस चुनाव को और भी अहम बना दिया है। इस बार एनडीए ने अपने उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को मैदान में उतारा है, जबकि इंडिया गठबंधन ने विपक्ष के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को। हालांकि एनडीए की जीत को तय माना जा रहा है, लेकिन विपक्ष का आत्मविश्वास कम नहीं हुआ है। 6 सितंबर को विपक्षी उम्मीदवार ने 100 फीसदी जीत का दावा किया, जिसका आधार हैं 133 ऐसे सांसद जो अभी तक किसी भी पक्ष के साथ नहीं हैं।

133 सांसद क्यों हैं अहम?
उपराष्ट्रपति चुनाव में कुल 782 सांसद (लोकसभा के 542 और राज्यसभा के 240) वोटिंग करते हैं। बहुमत पाने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 392 मत चाहिए। एनडीए के पास कुल 427 सांसदों का समर्थन है — जिसमें लोकसभा के 293 और राज्यसभा के 134 सदस्य शामिल हैं। वहीं विपक्ष के पास कुल 355 सांसद हैं।

लेकिन बात की जाए 133 सांसदों की, जो फिलहाल किसी भी पक्ष के साथ पूर्ण रूप से नहीं जुड़े हैं। ये सांसद निर्णायक साबित हो सकते हैं, क्योंकि विपक्ष को जीत के लिए केवल 37 सांसदों की आवश्यकता है। वहीं, यदि विपक्ष 133 सांसदों को अपने पक्ष में कर लेता है, तो चुनाव का समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।
विपक्ष को कैसे मिलेगा फायदा?
133 सांसदों की यह अनिश्चियता विपक्ष को रणनीतिक तौर पर फायदा पहुंचा सकती है। ये सांसद अपनी नीतिगत सहमति, क्षेत्रीय हित और व्यक्तिगत राजनीति के आधार पर अपने वोट का निर्णय कर सकते हैं। विपक्ष इस समूह को लुभाने में जुटा है क्योंकि ये सांसद एनडीए के सीधे समर्थन में नहीं हैं और उनकी भूमिका चुनाव के नतीजे तय कर सकती है।
एनडीए की चुनौती
एनडीए के लिए यह जरूरी है कि वह अपने मौजूदा समर्थन को मजबूत करे और 133 सांसदों को भी अपने पक्ष में लाने का प्रयास जारी रखे। हालांकि एनडीए के पास साफ बहुमत है, लेकिन अगर विपक्ष 133 सांसदों में से अधिकांश को अपनी तरफ खींचने में सफल हो जाता है, तो चुनाव की दिशा में बड़ा बदलाव आ सकता है।
विपक्ष का आत्मविश्वास
बी सुदर्शन रेड्डी द्वारा 100 फीसदी जीत का दावा विपक्ष के आत्मविश्वास को दर्शाता है। विपक्ष को भरोसा है कि वह 133 सांसदों के समर्थन से चुनाव का रुख अपने पक्ष में कर सकता है। इसके अलावा, विपक्ष यह भी मानता है कि एनडीए के कुछ सांसद इस चुनाव में गठबंधन को समर्थन दे सकते हैं।
उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 का समीकरण केवल एनडीए और विपक्ष के आधिकारिक समर्थन से नहीं, बल्कि 133 ऐसे सांसदों की भूमिका से तय होगा जो अभी तक किसी भी गठबंधन में पूरी तरह शामिल नहीं हुए हैं। यदि विपक्ष इन सांसदों को अपने पक्ष में ला पाता है, तो एनडीए की सहज जीत को चुनौती मिल सकती है। वहीं एनडीए भी इस स्थिति से पूरी तरह बेखबर नहीं है और वह भी अपने समर्थन को मजबूत करने में जुटा है। ऐसे में 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति चुनाव राजनीति के अगले महत्वपूर्ण अध्याय की शुरुआत कर सकता है।
Read More : Sudden Death in Sleep: नींद में अचानक मौत, क्यों होती है और किन कारणों से होती है यह खतरनाक स्थिति?










