Chhattisgarh conversion news: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ थाना क्षेत्र के गोधना गांव में रविवार को उस समय तनावपूर्ण माहौल बन गया, जब पुलिस ने प्रार्थना सभा की आड़ में धर्मांतरण कराने के आरोप में दो लोगों को हिरासत में लिया। इस कार्रवाई के बाद गांव के दर्जनों लोग थाने पहुंच गए और थाने का घेराव करते हुए गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग करने लगे।

क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के मुताबिक, गोधना गांव में एक धार्मिक सभा का आयोजन किया गया था, जिसे स्थानीय लोगों द्वारा ‘प्रार्थना सभा’ बताया गया। लेकिन कुछ हिंदू संगठनों ने इसे धर्मांतरण का प्रयास करार दिया और पुलिस को सूचना दी।

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मौके पर पहुंचकर दो लोगों को हिरासत में ले लिया। बताया जा रहा है कि जब पुलिस कार्रवाई कर रही थी, उस वक्त मौके पर हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता भी मौजूद थे और माहौल काफी तनावपूर्ण था।
थाने में बवाल, ग्रामीणों ने किया विरोध
जैसे ही हिरासत में लिए गए दो लोगों को नवागढ़ थाने लाया गया, गोधना गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में थाने पर जमा हो गए। वे लगातार पुलिस से दोनों लोगों को रिहा करने की मांग करते रहे। इस दौरान थाने के बाहर काफी देर तक हंगामा होता रहा और स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा।
ग्रामीणों का कहना था कि यह सिर्फ एक धार्मिक सभा थी और इसमें किसी तरह का धर्मांतरण नहीं कराया जा रहा था। वहीं, कुछ लोगों का आरोप है कि गांव में पिछले कुछ महीनों से लगातार ऐसी सभाओं के माध्यम से लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
पुलिस की ओर से क्या कहा गया?
नवागढ़ थाना प्रभारी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि प्राथमिक जांच के आधार पर दो लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। अभी तक किसी पर औपचारिक रूप से धर्मांतरण अधिनियम के तहत मामला दर्ज नहीं हुआ है, लेकिन जांच जारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि, “हम किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं हैं। यदि कोई दोषी पाया जाता है तो कानून के तहत उचित कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों को शांत कर दिया गया है और अब स्थिति नियंत्रण में है।”
क्या कहते हैं कानून?
छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर सख्त कानून मौजूद हैं। राज्य में धर्मांतरण की किसी भी गतिविधि के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य है। यदि कोई व्यक्ति या संस्था बिना अनुमति के धर्म परिवर्तन कराता है, तो यह कानूनन अपराध है और इसके लिए 3 से 5 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
आगे क्या?
फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सभी पक्षों से पूछताछ कर रही है। अगर धर्मांतरण का कोई स्पष्ट प्रमाण मिलता है, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, ग्रामीणों द्वारा थाने के घेराव के चलते इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी तूल पकड़ लिया है।
जांजगीर-चांपा का यह मामला छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण से जुड़े घटनाक्रमों की एक और कड़ी बन गया है। जहां एक ओर पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक असहिष्णुता और सामाजिक तनाव जैसे मुद्दे भी फिर सतह पर आ गए हैं।










