Nepal Gen Z protest: नेपाल की राजधानी काठमांडू समेत कई बड़े शहरों में इन दिनों जेनरेशन-Z (Gen-Z) का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दे रहा है। वजह है—सरकार द्वारा फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब सहित 25 प्रमुख सोशल मीडिया ऐप्स पर लगाया गया बैन। इस फैसले के विरोध में सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन तक घेर लिया, जिसके बाद पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और पूरे काठमांडू में कर्फ्यू लागू कर दिया गया।

सोशल मीडिया बैन क्यों?
केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार ने बीते सप्ताह इंटरनेट पर कथित “गैर-जिम्मेदार और भ्रामक कंटेंट” पर नियंत्रण के लिए सोशल मीडिया ऐप्स पर रोक लगाने का निर्णय लिया। सरकार का दावा है कि यह कदम देश की अखंडता और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी है। हालांकि, विपक्ष और नागरिक समाज इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं।

जेन-Z का गुस्सा क्यों फूटा?
नेपाल की युवा पीढ़ी, खासकर जेनरेशन-Z, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बेहद सक्रिय है, इसे सीधे अपने विचारों को व्यक्त करने की आज़ादी पर चोट मान रही है। प्रदर्शनकारियों के पोस्टर्स में लिखा है—”यह विरोध सिर्फ बैन के खिलाफ नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और तानाशाही रवैये के खिलाफ भी है।”
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार सोशल मीडिया पर सेंसरशिप लगाकर लोगों की आवाज दबाना चाहती है। संसद में विपक्ष ने भी इस कानून को ‘गला घोंटने वाला’ बताया, लेकिन बहुमत के दम पर इसे पारित कर दिया गया।
पर्दे के पीछे की राजनीति
इस पूरे घटनाक्रम में एक और दिलचस्प पहलू जुड़ गया है। प्रदर्शन में हिंदू राष्ट्रवाद के समर्थक और राजतंत्र की वापसी की मांग करने वाले दुर्गा प्रसाई भी शामिल हैं। हाल ही में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार हुए प्रसाई को जमानत मिली है। जून 2025 में उन्होंने काठमांडू में राजतंत्र के समर्थन में बड़ी रैली की थी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार के खिलाफ यह विरोध केवल सोशल मीडिया बैन तक सीमित नहीं है। यह सत्तारूढ़ पार्टी सीपीएम (यूएमएल) की अंदरूनी खींचतान और गठबंधन सहयोगी नेपाली कांग्रेस की नाराजगी का भी परिणाम है।
पूर्व राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी की सक्रिय राजनीति में वापसी की अटकलों से ओली सरकार के भीतर ही घमासान मचा हुआ है। दूसरी ओर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता समर्थन वापसी की बात कह चुके हैं। नेपाल में पहली बार सोशल मीडिया बैन को लेकर ऐसा उग्र विरोध देखने को मिल रहा है। यह सिर्फ एक टेक्नोलॉजी की लड़ाई नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी बनाम सत्ता की सीधी टक्कर बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन नेपाल की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।










