Sushila Karki PM: नेपाल में चल रहे राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के बीच, देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकीं सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, वह आज रात राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण करेंगी। कार्की की नियुक्ति उस समय हुई है जब देश गंभीर आंतरिक संकट और जनविरोध का सामना कर रहा है।

क्यों बदला नेपाल का राजनीतिक नेतृत्व?
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को जेन-जेड द्वारा किए गए तीव्र विरोध प्रदर्शनों के चलते इस्तीफा देना पड़ा। इन प्रदर्शनों की शुरुआत सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों के विरोध में हुई थी। युवाओं का आरोप था कि सरकार इंटरनेट और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाकर तानाशाही थोपना चाह रही है। विरोध प्रदर्शन ने तब हिंसक रूप ले लिया जब संसद भवन पर हमला हुआ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। दुर्भाग्यवश, हिंसा में 51 लोगों की मौत हुई, जिनमें एक भारतीय नागरिक भी शामिल था।

सोशल मीडिया पर प्रतिबंध बना विवाद का केंद्र
सरकार ने सोशल मीडिया पर यह कहते हुए पाबंदी लगाई थी कि फेक न्यूज और अफवाहों से सामाजिक सौहार्द बिगड़ रहा है। लेकिन जेन-जेड युवाओं ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया। विरोध के बढ़ते दबाव के चलते सरकार को यह पाबंदी वापस लेनी पड़ी।
संसद भंग, चुनाव की तैयारी
इस बीच, देश के प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच हुई बैठक में संसद को भंग करने और जल्द चुनाव कराने पर सहमति बन गई है। प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष देवराज घिमिरे और राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष नारायण दाहाल ने कहा कि राजनीतिक संकट का समाधान संविधान के दायरे में रहकर ही किया जाएगा।
कौन हैं सुशीला कार्की?
सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं और उन्हें साफ-सुथरी छवि और कठोर फैसलों के लिए जाना जाता है। अंतरिम पीएम के रूप में उनकी नियुक्ति से यह संकेत मिलता है कि देश अब निष्पक्ष और लोकतांत्रिक समाधान की ओर बढ़ रहा है।
नेपाल इस समय एक संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। सुशीला कार्की की नियुक्ति एक ऐतिहासिक कदम है, जिससे न केवल राजनीतिक स्थिरता की उम्मीद जगी है, बल्कि यह भी संकेत मिला है कि जनता की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आगामी दिनों में नेपाल में चुनाव की घोषणा हो सकती है, जिससे देश की दिशा और दशा तय होगी।










