Israel Gaza Aattack: मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद एक बार फिर टूट गई है। शनिवार को गाज़ा पर हुए इज़राइली हवाई हमले में कम से कम 32 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 12 मासूम बच्चे भी शामिल हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ है जब युद्धविराम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत चल रही है, लेकिन इज़राइल की ओर से लगातार बढ़ते हमलों ने संकेत दे दिया है कि फिलहाल युद्धविराम की कोई मंशा नजर नहीं आ रही।

एक ही परिवार के 10 लोग मारे गए
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गाज़ा के शेख रादवान इलाके में हुए एक हमले में एक ही परिवार के 10 सदस्य मारे गए हैं। मृतकों में एक मां और उसके तीन मासूम बच्चे शामिल हैं। यह हमला न केवल सैन्य कार्रवाई का हिस्सा था, बल्कि मानवीय त्रासदी की एक और मिसाल बन गया।

खिलाड़ी समेत 14 की मौत
फिलिस्तीनी फुटबॉल एसोसिएशन के मुताबिक, अल-हिलाल स्पोर्टिंग क्लब के खिलाड़ी मोहम्मद रमेज सुल्तान भी इस हमले में मारे गए। उनके साथ उनके पूरे परिवार के 14 सदस्य भी मारे गए हैं। यह घटना दर्शाती है कि इस युद्ध का असर अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को अपनी चपेट में ले चुका है।
गाज़ा बन चुका है मलबे का ढेर
इज़राइल के लगातार हमलों ने गाज़ा को लगभग पूरी तरह से मलबे में तब्दील कर दिया है। 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के आतंकी हमले के जवाब में इज़राइल ने सैन्य अभियान शुरू किया था। तब से अब तक गाज़ा में 60,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 2 लाख से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बड़ी संख्या में नागरिकों का विस्थापन भी हुआ है और बुनियादी ढांचे पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं।
अमेरिका का हस्तक्षेप और ट्रंप का बयान
वहीं, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि “वॉशिंगटन, हमास के साथ गहराई से बातचीत कर रहा है। यदि हमास बंधकों को रिहा नहीं करता, तो उनके लिए हालात और भी मुश्किल हो सकते हैं।” ट्रंप के बयान से यह स्पष्ट है कि अमेरिका युद्ध को रोकने के प्रयासों में लगा है, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
नेतन्याहू सरकार पर सवाल
इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा हमास के खिलाफ युद्ध की घोषणा के बाद से ही इज़राइल अंदर से भी दबाव में है। कई लोग आरोप लगा रहे हैं कि नेतन्याहू बंधकों की रिहाई के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं कर रहे। इस बात को लेकर देश में राजनीतिक असंतोष भी बढ़ता जा रहा है।
गाज़ा में शनिवार का हवाई हमला इस बात का सबूत है कि संघर्ष की आग अभी भी भड़की हुई है। जहां एक ओर दुनिया युद्धविराम और शांति की अपील कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत पूरी तरह अलग नजर आ रही है। बच्चों और आम नागरिकों की मौतें इस युद्ध की क्रूरता को उजागर करती हैं। अब देखना यह होगा कि क्या वैश्विक दबाव और मानवीय त्रासदी मिलकर इस रक्तपात को रोक पाएंगे या हालात और बिगड़ेंगे।
Read More: IND-W vs AUS-W :भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया महिला टीम का वनडे हेड-टू-हेड रिकॉर्ड










