AIMIM Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी ने INDIA गठबंधन में शामिल होने के लिए आरजेडी नेतृत्व को तीन चिट्ठियां लिखीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें गठबंधन में जगह नहीं मिली। ओवैसी ने तीखा सवाल भी उठाया – “अब भी क्या हमें बीजेपी की ‘बी टीम’ कहा जाएगा?”

तीन चिट्ठियों का भी नहीं हुआ असर
बुधवार को एक प्रेस वार्ता में असदुद्दीन ओवैसी ने बताया कि AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमाम ने RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव को दो और नेता तेजस्वी यादव को एक चिट्ठी लिखी थी। चिट्ठियों में सिर्फ 6 विधानसभा सीटों की मांग की गई थी, वो भी सीमांचल क्षेत्र में। ओवैसी का कहना है कि, “हमने सिर्फ सीमांचल विकास बोर्ड की मांग की थी, न कोई मंत्रालय मांगा, न ज्यादा सीटें। लेकिन हमें कहा गया कि इस बार आप चुनाव में हिस्सा ही मत लीजिए।”

2020 में किया था चौंकाने वाला प्रदर्शन
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में AIMIM ने सीमांचल में दमदार प्रदर्शन करते हुए 5 सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि बाद में पार्टी के चार विधायक RJD में शामिल हो गए। सिर्फ अख्तरुल इमाम AIMIM में बने रहे और अब वह पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष हैं।
गठबंधन से बाहर रहकर लड़ेगी AIMIM
ओवैसी ने साफ कर दिया है कि AIMIM इस बार भी बिहार चुनाव में पूरी ताकत से उतरेगी, लेकिन INDIA गठबंधन के बाहर से। उन्होंने कहा, “हमारा मकसद सीमांचल के मुसलमानों, पिछड़ों और वंचितों की आवाज़ को विधानसभा में पहुंचाना है। लेकिन हमें बार-बार दरकिनार किया जाता है।”
गठबंधन में रुकावट बने वाम दल?
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस और RJD AIMIM को गठबंधन में शामिल करने को लेकर सकारात्मक थे। तेजस्वी यादव को भी यह लगता है कि सीमांचल में AIMIM के साथ आने से भाजपा को रोकने में मदद मिल सकती है। लेकिन वाम दलों ने AIMIM के साथ किसी भी तरह के तालमेल से इनकार कर दिया है। उनका तर्क है कि AIMIM की विचारधारा और राजनीति से उनका मेल नहीं बैठता।
वहीं, जिन 6 सीटों पर AIMIM चुनाव लड़ना चाहती थी, वे अधिकतर कांग्रेस के प्रभाव वाले क्षेत्र हैं। ऐसे में सीटों के बंटवारे को लेकर भी गतिरोध बना रहा।
बिहार चुनाव से पहले AIMIM और INDIA गठबंधन के बीच दूरी ने राजनीतिक समीकरणों को और पेचीदा बना दिया है। सीमांचल की मुस्लिम बहुल सीटों पर AIMIM का प्रभाव जरूर है, लेकिन गठबंधन की राजनीति में इसे अब भी जगह नहीं मिल रही। ओवैसी की चिट्ठियों और अपीलों का असर नहीं हुआ, और AIMIM अब अकेले मैदान में उतरने को तैयार है।
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