Indian Politics: कांग्रेस ओवरसीज प्रमुख सैम पित्रोदा द्वारा पाकिस्तान को “अपना घर” कहे जाने पर देश की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। भाजपा ने इस विवादित बयान को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस नेतृत्व को घेरा है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीधे राहुल गांधी और सोनिया गांधी से जवाब मांगा है।

भाजपा का सवाल: “आप चुप क्यों हैं?”
भंडारी ने कहा, “जब पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने राहुल गांधी को अपना आदर्श बताया था, तब कांग्रेस चुप क्यों रही? जब आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा कांग्रेस से बातचीत करना चाहता था, तब भी कांग्रेस खामोश क्यों रही?” उन्होंने आगे कहा कि, “अब जब सैम पित्रोदा पाकिस्तान को अपना घर बताते हैं, तो गांधी परिवार फिर चुप क्यों है? क्या ये चुप्पी इस विचारधारा की स्वीकृति नहीं है?”

“भारतीय लोकतंत्र में अराजकता फैलाना चाहते हैं कांग्रेस नेता”
प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी के हालिया बयानों का हवाला देते हुए कहा कि “राहुल गांधी कहते हैं कि भारतीय लोकतंत्र की रक्षा करना उनका काम नहीं है, लेकिन वे यह जरूर कहते हैं कि वे भारतीय राज्य के खिलाफ लड़ेंगे। ये दोहरे मानदंड नहीं तो और क्या हैं?”भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की विचारधारा और उनके नेताओं के बयान देश में अराजकता और अस्थिरता फैलाने की साजिश का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से देश की एकता और अखंडता पर सीधा हमला होता है।
“सैम पित्रोदा के बयान पर माफी मांगे गांधी परिवार”
प्रदीप भंडारी ने मांग की कि “गांधी-वाड्रा परिवार को सैम पित्रोदा के बयान के लिए देश से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब भी सैम पित्रोदा जैसे नेताओं को अहम पदों पर बनाए हुए है, जो भारत के विरुद्ध बयानबाज़ी करते हैं और पाकिस्तान को अपना घर कहते हैं।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया?
इस विवाद पर कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि पित्रोदा के बयान से पार्टी को एक बार फिर मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है, खासकर जब देश में राष्ट्रवाद और सुरक्षा जैसे मुद्दे प्राथमिकता में हैं।
सैम पित्रोदा के विवादित बयान ने कांग्रेस को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। भाजपा ने एक बार फिर गांधी परिवार को कटघरे में खड़ा कर दिया है और देश से माफी की मांग की है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर चुनावी मंच तक चर्चा का केंद्र बन सकता है।










