Soumya Chaurasia coal scam: राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने कोयला घोटाला मामले में निलंबित अफसर सौम्या चौरसिया की करीब 8 करोड़ रुपए मूल्य की 16 अचल संपत्तियों को सीज करने की कार्रवाई की है। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच के तहत की गई है। EOW ने धारा 13(1)बी, 13(2) पीसी एक्ट 1988 के तहत इन संपत्तियों को कुर्क किया है।

आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप
सौम्या चौरसिया पर गंभीर आरोप हैं कि उन्होंने अपने रिश्तेदारों जैसे सौरभ मोदी, अनुराग चौरसिया और अन्य के नाम पर करीब 47 करोड़ रुपये की 45 अचल संपत्तियां खरीदीं, जो उनकी वैध आय के मुकाबले कहीं अधिक हैं। इस मामले की जांच में EOW को यह प्रमाण मिले कि ये संपत्तियां भ्रष्ट माध्यमों से अर्जित की गई हैं।

प्रवर्तन निदेशालय की पहले की कार्रवाई
इससे पहले, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सौम्या चौरसिया की करीब 39 करोड़ रुपए मूल्य की 29 अचल संपत्तियों को कुर्क किया था। EOW ने शेष 16 अचल संपत्तियों को कुर्क करने के लिए 16 जून 2025 को विशेष न्यायालय में आवेदन किया था।
न्यायालय ने दिया अंतरिम आदेश
विशेष न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए 22 सितंबर 2025 को इन 16 अचल संपत्तियों को अंतरिम रूप से कुर्क करने का आदेश दिया। इसके बाद EOW ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इन संपत्तियों को सीज कर दिया। यह कदम भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
कोयला घोटाले की जांच में तेजी
कोयला घोटाला, जो पिछले कई वर्षों से जांच के दायरे में है, में कई अधिकारियों और व्यवसायियों के नाम सामने आए हैं। सौम्या चौरसिया की संपत्तियों की कुर्की इस मामले में जांच की गहराई और ईमानदारी को दर्शाती है। यह कदम भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
EOW और ED की संयुक्त कार्रवाई
EOW और ED की संयुक्त कार्रवाई से यह साफ हुआ है कि भ्रष्टाचार के मामलों में जांच एजेंसियां तेजी से काम कर रही हैं और आरोपी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठा रही हैं। इससे भविष्य में भ्रष्टाचार में संलिप्त अधिकारियों के लिए भी एक चेतावनी संदेश जाएगा।
राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो द्वारा सौम्या चौरसिया की करोड़ों की संपत्तियों को कुर्क करना कोयला घोटाले में न्यायिक प्रक्रिया की गति और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को दर्शाता है। इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश जाता है कि कोई भी भ्रष्ट अधिकारी बिना सजा के नहीं रहेगा। जांच एजेंसियां भ्रष्टाचार के मामलों में कठोरता से कदम उठा रही हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।










