US Shutdown: अमेरिका एक बार फिर से सरकारी शटडाउन की चपेट में आ गया है। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी सीनेट में अस्थायी फंडिंग बिल पास करवाने में असफल रही, जिसके चलते यह संकट पैदा हुआ है। बिल को पास करने के लिए 60 वोटों की जरूरत थी, लेकिन केवल 55 वोट ही मिल सके। इसके चलते संघीय फंडिंग का विस्तार नहीं हो पाया और कई सरकारी एजेंसियों के कामकाज पर इसका सीधा असर पड़ने लगा है।

FAA के 11,000 कर्मचारियों पर असर
इस शटडाउन का सबसे बड़ा असर संघीय विमानन प्रशासन (FAA) पर पड़ता दिख रहा है। अमेरिकी परिवहन विभाग के अनुसार, यदि बजट संकट जल्द नहीं सुलझा, तो FAA को अपने लगभग 11,000 कर्मचारियों को अनिवार्य अवकाश (Unpaid Leave) पर भेजना पड़ सकता है। यह FAA की कुल वर्कफोर्स का लगभग 25% हिस्सा है।

हवाई सेवाएं हो सकती हैं प्रभावित
हवाई यात्रा करने वालों के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। FAA कर्मचारियों की छुट्टी और सीमित संसाधनों के चलते, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, सुरक्षा जांच, और तकनीकी निरीक्षणों में देरी की आशंका है। एयरलाइनों का कहना है कि यदि यह शटडाउन लंबा चला, तो फ्लाइट्स में देरी और रद्दीकरण आम हो जाएंगे। इससे यात्रियों को असुविधा और एयरलाइन इंडस्ट्री को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ट्रंप प्रशासन का दूसरा शटडाउन
यह डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल का दूसरा बड़ा शटडाउन है। इससे पहले वर्ष 2018 में भी 34 दिनों तक शटडाउन चला था, जिससे अमेरिकी सरकारी सेवाएं ठप हो गई थीं। अब फिर से बजट विवाद के चलते संकट गहरा गया है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप इस मौके का इस्तेमाल कर्मचारियों की छंटनी के लिए भी कर सकते हैं।
क्या होता है शटडाउन?
सरकारी शटडाउन का मतलब होता है कि जब अमेरिका की सरकार वार्षिक बजट पर सहमति नहीं बना पाती और जरूरी फंडिंग रोक दी जाती है। इससे कई सरकारी विभागों को अपना कामकाज अस्थायी रूप से बंद करना पड़ता है, क्योंकि उनके पास वेतन देने और संचालन के लिए पैसे नहीं होते।
समाधान की अपील
एयरलाइनों और कर्मचारी यूनियनों ने अमेरिकी कांग्रेस से अपील की है कि जल्द से जल्द बजट विवाद का समाधान निकाला जाए। यदि स्थिति नहीं सुधरी तो न केवल यात्री सेवाएं, बल्कि अमेरिका की आर्थिक स्थिति पर भी इसका दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। अमेरिका में एक बार फिर से सरकारी शटडाउन ने FAA और हवाई सेवाओं को संकट में डाल दिया है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो यह संकट न केवल हजारों कर्मचारियों की रोज़ी-रोटी पर असर डालेगा, बल्कि आम यात्रियों को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।










