Sonam Wangchuk news: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की न्यायिक सहायता को लेकर गहराती संकट की खबरें सामने आ रही हैं। उनकी पत्नी और सामाजिक कार्यकर्ता गीतांजलि आंगमो ने हाल ही में बताया कि उन्हें न्यायिक मदद बिल्कुल भी नहीं मिल रही है। गीतांजलि ने कहा कि उन्हें एक शीर्ष संस्था के सदस्य से सूचना मिली कि पुलिस के डीएसपी (Deputy Superintendent of Police) ने सोनम से मिलने की बात कही, लेकिन वह इसे लिखित में मांगने पर भी कोई जवाब नहीं मिला।

सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई
गीतांजलि आंगमो ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि दिल्ली में हर जगह उनका पीछा किया जा रहा है और वे जहां भी जाती हैं, एक संदिग्ध कार उनका पीछा करती रहती है। इसके अलावा, उनके साथ काम करने वाले कई कर्मचारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। वे पुलिस हिरासत में पीट-पीटकर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेल रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा
गीतांजलि ने बताया कि सोनम वांगचुक को अमानवीय व्यवहार के तहत हिरासत में रखा गया है, जबकि उनके खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इस अत्याचार के कारण उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है। उनका कहना है कि यदि देश की एक प्रतिष्ठित जलवायु कार्यकर्ता के साथ न्याय में देरी हो सकती है, तो आम नागरिकों के लिए न्याय की क्या स्थिति होगी।
गीतांजलि ने देश और दुनिया से अपील की है कि सोनम वांगचुक और उनके साथ हिरासत में लिए गए अन्य कार्यकर्ताओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को लेकर आवाज़ उठाई जाए। उनका मानना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि पूरे देश के लोकतंत्र और न्यायिक प्रणाली की परीक्षा है।
न्याय और सुरक्षा की आवश्यकता
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ आवाज उठाने वाले सोनम वांगचुक और उनके परिवार पर बढ़ते दबाव ने देश में एक बड़ी चिंता उत्पन्न कर दी है। कार्यकर्ताओं की सुरक्षा और उनके प्रति न्याय सुनिश्चित करना लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है। पुलिस की हिरासत में शारीरिक व मानसिक यातनाएं लोकतंत्र की मूलभूत संस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
देश में बढ़ते दबाव और जनता की प्रतिक्रिया
सोनम वांगचुक के मामले ने सोशल मीडिया और विभिन्न जन समुदायों में भारी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। कई संगठनों और आम नागरिकों ने उनकी रिहाई और न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है। इसे देशभर में मानवाधिकारों और न्यायिक स्वतंत्रता के लिए लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।
सोनम वांगचुक की हिरासत और उनके साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार की खबरें न्यायपालिका, मानवाधिकार संगठनों और आम जनता के लिए चिंता का विषय हैं। गीतांजलि आंगमो की ये बातें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि न्याय व्यवस्था को तेजी से कार्रवाई करनी होगी ताकि किसी भी कार्यकर्ता या नागरिक के साथ अन्याय न हो। देश को जलवायु संकट के साथ-साथ अपने न्यायिक संस्थानों को भी मजबूत करना होगा।
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