Rajnath Singh JITO: जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (JITO) के कनेक्ट 2025 कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जैन समाज की अपरिग्रह की शिक्षा को आधुनिक जीवन के लिए मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन हमें एक ऐसा संतुलित जीवन जीने का मार्ग दिखाता है, जहां हम आधुनिकता को अपनाते हुए भी प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रख सकते हैं।

अपरिग्रह: संयम और संतुलन की शिक्षा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में जैन समाज की अपरिग्रह की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हमारी परंपरा हमेशा यह सिखाती रही है कि हम केवल भोग के लिए न जिएं, बल्कि योग और त्याग के मार्ग पर चलें।” उन्होंने बताया कि अपरिग्रह का अर्थ है जीवन में अनावश्यक भोग-लालसा से बचना और सादगी अपनाना, जो आज के समय में अत्यंत आवश्यक है।

प्राकृतिक संसाधनों पर संकट और जैन विचारों की प्रासंगिकता
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज जब दुनिया असीमित भोग और उपभोग की तरफ बढ़ रही है, तब प्राकृतिक संसाधन गंभीर संकट में हैं। ऐसे समय में जैन समाज के विचार हमें संयम और संतुलन का रास्ता दिखाते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता के लिए अपरिग्रह की शिक्षाओं को अपनाना आवश्यक है।
योग और त्याग का संदेश
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि जैन दर्शन में योग और त्याग को जीवन का अभिन्न हिस्सा माना गया है। यह हमें मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ आत्मिक उन्नति का मार्ग भी दिखाता है। उन्होंने कहा, “योग और त्याग के माध्यम से हम न केवल अपने जीवन को सरल और सार्थक बना सकते हैं, बल्कि पर्यावरण की रक्षा में भी योगदान दे सकते हैं।”
JITO के योगदान को सराहना
राजनाथ सिंह ने JITO के द्वारा आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में किए गए योगदान की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि JITO ने व्यापार और उद्यमिता के क्षेत्र में जैन समाज की एकता और सामर्थ्य को बढ़ावा दिया है। उन्होंने यह भी आशा जताई कि JITO भविष्य में भी समाज के विकास और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के विचारों से स्पष्ट होता है कि जैन समाज की अपरिग्रह, योग और त्याग की शिक्षाएं न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि आज के पर्यावरण और सामाजिक संकटों से निपटने के लिए भी बेहद प्रासंगिक हैं। जैन दर्शन हमें सिखाता है कि आधुनिक जीवनशैली में भी संयम, संतुलन और प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखना संभव है।
यह संदेश आज के भारत और विश्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां संसाधनों का संरक्षण और स्थायी विकास की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। JITO कनेक्ट 2025 के माध्यम से यह विचार व्यापक जनसमूह तक पहुंचे, यही उम्मीद की जा रही है।











