Bihar Assembly Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों का आखिरकार एलान हो गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जाएंगे। पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा। मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी और चुनावी प्रक्रिया कुल 40 दिनों में पूरी की जाएगी।

इस घोषणा के साथ ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। अब सभी राजनीतिक दलों की चुनावी तैयारियां और रणनीतियाँ अंतिम रूप लेने लगी हैं।

दो फेज में चुनाव: क्यों लिया गया फैसला?
चुनाव आयोग ने त्योहारों और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए चुनाव दो चरणों में कराने का निर्णय लिया है। पिछले वर्षों में भी बिहार में बहु-चरणीय चुनाव होते रहे हैं। आयोग के अनुसार, इससे प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
फाइनल वोटर लिस्ट जारी, नाम अब भी जुड़वाए जा सकते हैं
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि चुनावों के लिए SIR (Systematic Voters’ Registration) के तहत मतदाता सूची को अपडेट किया गया है। हालांकि, यदि किसी eligible वोटर का नाम सूची में नहीं है, तो वह अब भी नामांकन से 10 दिन पहले तक अपना नाम जुड़वा सकता है।
ऐसे नए मतदाताओं को नया वोटर आईडी कार्ड भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए संबंधित जिला निर्वाचन कार्यालय या BLO (Booth Level Officer) से संपर्क किया जा सकता है।
वोटर्स के लिए आसान और पारदर्शी व्यवस्था
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, “हमारा उद्देश्य है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को पूरी पारदर्शिता, सुगमता और विश्वसनीयता के साथ संपन्न कराया जाए। सभी मतदाताओं को निर्भीक और सुविधाजनक माहौल में मतदान का अवसर मिलेगा।”
चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मतदान केंद्रों पर महिला और बुजुर्ग मतदाताओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही दिव्यांगजनों के लिए रैंप, व्हीलचेयर और वॉलंटियर की व्यवस्था की जाएगी।
243 सीटों पर कड़ा मुकाबला तय
बिहार विधानसभा की 243 सीटों पर इस बार भी तीखी चुनावी टक्कर देखने को मिलेगी। पिछली बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी आरजेडी और अनुभवी नीतीश कुमार की अगुवाई वाला गठबंधन आमने-सामने होगा। साथ ही युवा मतदाता, जातीय समीकरण, रोजगार और विकास के मुद्दे इस बार चुनावी एजेंडे में छाए रहेंगे।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों के ऐलान के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। दो चरणों में होने वाले इन चुनावों को लेकर मतदाता और राजनीतिक दलों में उत्साह है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि हर वोट की अहमियत है और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
पारदर्शिता और सुगमता की चुनाव आयोग की प्रतिबद्धता
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव पूरी पारदर्शिता के साथ कराए जाएंगे। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग की टीम ने बिहार के सभी जिलों का दौरा किया, जहां राजनीतिक दलों, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों, तथा केंद्रीय बलों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की गई। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया को लेकर विस्तार से मंथन किया गया।
ज्ञानेश कुमार ने आश्वस्त किया, “इस बार का बिहार चुनाव सबसे सुगम, पारदर्शी और मतदाता हितैषी चुनावों में गिना जाएगा।” आयोग की कोशिश है कि हर मतदाता को चुनाव में भागीदारी का पूरा अवसर मिले।
चुनाव आयोग ने बताया- वोटर्स की सुविधा का रखा जा रहा ख्याल
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार बिहार में कुल 90,712 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां औसतन प्रति केंद्र 818 मतदाता रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 76,801 मतदान केंद्र ग्रामीण इलाकों में हैं, जबकि 13,911 शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था (100%) की गई है। साथ ही, 1,350 मॉडल मतदान केंद्र भी स्थापित किए गए हैं ताकि मतदाताओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि बिहार चुनाव से 17 नए इनिशिएटिव लिए गए हैं।
संभावित दो चरणों में हो सकती है वोटिंग
बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों में से 38 अनुसूचित जाति (SC) और 2 अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं। चुनाव आयोग को यह चुनाव प्रक्रिया 22 नवंबर 2025 तक पूरी करनी है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने मांग की है कि छठ पर्व के बाद मतदान कराया जाए। इस परिस्थिति को देखते हुए, संभावना जताई जा रही है कि इस बार दो चरणों में चुनाव हो सकते हैं।
गौरतलब है कि 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव तीन चरणों में आयोजित हुए थे, जबकि 2015 में पांच चरणों में वोटिंग हुई थी।
वोटर लिस्ट में अभी भी हो सकता है सुधार
ज्ञानेश कुमार ने मतदाताओं को यह जानकारी दी कि यदि किसी का नाम छूटा है या सूची में कोई गलती है, तो वे जिला अधिकारी के पास अपील कर सकते हैं। यह सुविधा नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने से 10 दिन पहले तक उपलब्ध रहेगी। उसके बाद मतदाता सूची में कोई बदलाव संभव नहीं होगा।
आयोग की तैयारी और प्रक्रिया
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि 25 जून 2024 से SIR प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट को अपडेट किया गया। 1 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट सभी राजनीतिक दलों को भेजी गई थी, जिसके बाद क्लेम और ऑब्जेक्शन के लिए समय दिया गया।
ज्ञानेश कुमार ने कहा, “चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और इसका कर्तव्य दो चरणों में बंटा है — पहला, सटीक और समावेशी मतदाता सूची बनाना और दूसरा, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चुनाव कराना।”बिहार की राजनीति में एक बार फिर से चुनावी रंग चढ़ने लगा है। कुछ ही घंटों में चुनाव की तारीखें तय हो जाएंगी और राज्य की 243 विधानसभा सीटों के लिए लोकतंत्र का उत्सव शुरू हो जाएगा। मतदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपनी वोटर लिस्ट की जानकारी समय रहते जांच लें और यदि ज़रूरत हो तो अपने नाम को जुड़वाने की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी करें।











