Bihar Elections 2025: EC का बड़ा ऐलान, सोशल मीडिया और AI भी आचार संहिता के दायरे में, दलों को सख्त निर्देश

Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का बिगुल बज चुका है और इसके साथ ही चुनाव आयोग (Election Commission) ने चुनाव प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस बार आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct – MCC) का दायरा केवल जमीनी प्रचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सोशल मीडिया और इंटरनेट भी इसकी जद में आएंगे। EC ने जारी किए 7-सूत्रीय दिशा-निर्देश 9 अक्टूबर को चुनाव आयोग द्वारा जारी पत्र में सात बिंदुओं को स्पष्ट करते हुए कहा गया कि डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग रोकना जरूरी है। आयोग ने राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और स्टार प्रचारकों को AI, सोशल मीडिया, मीम्स और वीडियो के जिम्मेदार इस्तेमाल के निर्देश दिए हैं। सोशल मीडिया पर भी MCC लागू अब से फेसबुक, X (पूर्व में ट्विटर), यूट्यूब, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित की जा रही प्रचार सामग्री आचार संहिता के नियमों के तहत आंकी जाएगी। फर्जी या भ्रामक प्रचार, चरित्र हनन और नफरत फैलाने वाली पोस्ट पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। आयोग ने साफ कर दिया है कि नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह ऑनलाइन हो या ऑफलाइन। AI वीडियो पर विशेष निगरानी हाल ही में कुछ दलों द्वारा विरोधी नेताओं के खिलाफ AI-जेनरेटेड वीडियो के उपयोग को लेकर विवाद हुआ था, जिससे कोर्ट तक का मामला बना। इसे देखते हुए EC ने निर्देश दिए हैं कि अगर कोई राजनीतिक दल AI आधारित वीडियो या कंटेंट का उपयोग करता है, तो उस पर स्पष्ट रूप से ‘AI निर्मित वीडियो’ का लेबल अनिवार्य होगा। आलोचना की भी सीमा तय चुनाव आयोग ने दलों को यह भी चेतावनी दी है कि वे चुनाव प्रचार के दौरान व्यक्तिगत हमलों और झूठे आरोपों से बचें। आयोग के मुताबिक, आलोचना नीतियों, कार्यक्रमों और रिकॉर्ड तक सीमित रहनी चाहिए। किसी नेता के निजी जीवन या परिवार से जुड़े ऐसे मुद्दों को उछालना जो सार्वजनिक गतिविधियों से संबंधित नहीं हैं, पूर्णतः वर्जित रहेगा। चुनाव प्रचार में संयम जरूरी EC ने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार के दौरान भाषा की मर्यादा बनाए रखनी होगी। बिना प्रमाण के विकृत या भ्रामक सूचनाएं फैलाना, किसी धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ प्रचार करना, गंभीर दंडनीय अपराध माना जाएगा। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 सिर्फ एक राजनीतिक परीक्षा नहीं, बल्कि डिजिटल मर्यादा की कसौटी भी बन चुका है। चुनाव आयोग का यह कदम स्पष्ट करता है कि लोकतंत्र को सुरक्षित रखने के लिए अब डिजिटल मंचों पर भी जवाबदेही जरूरी है। Read More  : NRC Notice Bengal: क्यों NRC नोटिस ने बंगाल में सियासी तूफ़ान खड़ा कर दिया? — ममता का हमला, लोगों में चिंता

Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का बिगुल बज चुका है और इसके साथ ही चुनाव आयोग (Election Commission) ने चुनाव प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस बार आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct – MCC) का दायरा केवल जमीनी प्रचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सोशल मीडिया और इंटरनेट भी इसकी जद में आएंगे।

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EC ने जारी किए 7-सूत्रीय दिशा-निर्देश

9 अक्टूबर को चुनाव आयोग द्वारा जारी पत्र में सात बिंदुओं को स्पष्ट करते हुए कहा गया कि डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग रोकना जरूरी है। आयोग ने राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और स्टार प्रचारकों को AI, सोशल मीडिया, मीम्स और वीडियो के जिम्मेदार इस्तेमाल के निर्देश दिए हैं।

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सोशल मीडिया पर भी MCC लागू

अब से फेसबुक, X (पूर्व में ट्विटर), यूट्यूब, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित की जा रही प्रचार सामग्री आचार संहिता के नियमों के तहत आंकी जाएगी। फर्जी या भ्रामक प्रचार, चरित्र हनन और नफरत फैलाने वाली पोस्ट पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। आयोग ने साफ कर दिया है कि नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह ऑनलाइन हो या ऑफलाइन।

AI वीडियो पर विशेष निगरानी

हाल ही में कुछ दलों द्वारा विरोधी नेताओं के खिलाफ AI-जेनरेटेड वीडियो के उपयोग को लेकर विवाद हुआ था, जिससे कोर्ट तक का मामला बना। इसे देखते हुए EC ने निर्देश दिए हैं कि अगर कोई राजनीतिक दल AI आधारित वीडियो या कंटेंट का उपयोग करता है, तो उस पर स्पष्ट रूप से ‘AI निर्मित वीडियो’ का लेबल अनिवार्य होगा।

आलोचना की भी सीमा तय

चुनाव आयोग ने दलों को यह भी चेतावनी दी है कि वे चुनाव प्रचार के दौरान व्यक्तिगत हमलों और झूठे आरोपों से बचें। आयोग के मुताबिक, आलोचना नीतियों, कार्यक्रमों और रिकॉर्ड तक सीमित रहनी चाहिए। किसी नेता के निजी जीवन या परिवार से जुड़े ऐसे मुद्दों को उछालना जो सार्वजनिक गतिविधियों से संबंधित नहीं हैं, पूर्णतः वर्जित रहेगा।

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चुनाव प्रचार में संयम जरूरी

EC ने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार के दौरान भाषा की मर्यादा बनाए रखनी होगी। बिना प्रमाण के विकृत या भ्रामक सूचनाएं फैलाना, किसी धर्म, जाति या समुदाय के खिलाफ प्रचार करना, गंभीर दंडनीय अपराध माना जाएगा।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 सिर्फ एक राजनीतिक परीक्षा नहीं, बल्कि डिजिटल मर्यादा की कसौटी भी बन चुका है। चुनाव आयोग का यह कदम स्पष्ट करता है कि लोकतंत्र को सुरक्षित रखने के लिए अब डिजिटल मंचों पर भी जवाबदेही जरूरी है।

Read More  : NRC Notice Bengal: क्यों NRC नोटिस ने बंगाल में सियासी तूफ़ान खड़ा कर दिया? — ममता का हमला, लोगों में चिंता

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