NDA Seat Sharing: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीटों के बंटवारे को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। बीजेपी और जदयू के अलावा गठबंधन में शामिल प्रमुख सहयोगी दल अवाम हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) को कुल छह सीटें मिली हैं। इस सीट शेयरिंग को लेकर HAM के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि NDA में उनकी पार्टी की ताकत को कम आंका गया है और इसका गठबंधन को भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

सीट शेयरिंग पर जीतन राम मांझी का बयान
जीतन राम मांझी ने कहा, “एनडीए ने हमारी ताकत को सही तरीके से नहीं पहचाना। हमें सिर्फ छह सीटें देकर हमारे महत्व को कम आंका गया है, और यह गलती एनडीए को आगे जाकर महंगी पड़ सकती है।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी आलाकमान के फैसले का सम्मान करती है और उसे स्वीकार करती है। उन्होंने स्पष्ट किया, “आलाकमान का फैसला सिर माथे पर है, परंतु सिर्फ छह सीटें मिलना हमारी राजनीतिक ताकत के अनुरूप नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “पिछले समय में जब हमें संसद में केवल एक सीट दी गई थी, तो क्या हम नाराज थे? नहीं। इसी तरह अगर हमें छह सीटें मिली हैं तो हम इसे सम्मानपूर्वक स्वीकार करते हैं, और कोई शिकायत नहीं है।”
एनडीए में सीट बंटवारे की स्थिति
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए NDA ने सीट शेयरिंग का ऐलान कर दिया है। इस हिसाब से बीजेपी और जदयू दोनों को 101-101 सीटें मिली हैं। जबकि सहयोगी दलों में लोजपा (रामविलास) को 29 सीटें मिली हैं। वहीं, आरएलएम और हम पार्टी को छह-छह सीटें दी गई हैं। इस सीट बंटवारे से गठबंधन की सियासी पिच पर गठबंधन की ताकत का पता चलता है।
हम पार्टी किन सीटों पर लड़ेगी चुनाव?
HAM को मिली छह सीटों में टेकारी, कुटुंबा, अतरी, इमामगंज, सिकंदरा और बराचट्टी विधानसभा सीटें शामिल हैं। इन सीटों पर जीतन राम मांझी की पार्टी चुनाव लड़ेगी और पूर्ण रूप से गठबंधन के साथ चुनाव प्रचार में जुटेगी। पार्टी को उम्मीद है कि इन सीटों पर मजबूत पकड़ बनाकर वे अपने राजनीतिक दावों को मजबूत कर सकेंगे।
आगामी बिहार चुनाव में HAM की भूमिका
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में HAM का गठबंधन के अंदर दायरा और प्रभाव सीमित नजर आ रहा है। हालांकि जीतन राम मांझी की पार्टी चुनावी रणनीति और लोकल सीटों पर खासा प्रभाव रखती है। इसलिए पार्टी अपनी ताकत के अनुसार और अधिक सीटों की मांग कर रही थी। मांझी का बयान गठबंधन के अंदर मौजूद असंतोष को भी दर्शाता है, जो आने वाले दिनों में गठबंधन के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
एनडीए में सीट शेयरिंग पर जीतन राम मांझी का बयान गठबंधन के भीतर राजनीतिक मतभेदों की झलक है। HAM को मिली कम सीटों से उनके नेता नाराज हैं और उन्होंने इसका असर गठबंधन पर पड़ने की चेतावनी भी दी है। आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में HAM की भूमिका और गठबंधन की स्थिरता राजनीतिक पर्यवेक्षकों की निगाहों का केंद्र बनी हुई है।











