हिंदी दिवस पर अमित शाह ने कहा कि हिंदी भारतीय भाषाओं को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। उन्होंने लोगों से ग्लोबल भाषाएं सीखने की अपील की, लेकिन अपनी भाषा और जड़ों को न भूलने का संदेश दिया। शाह ने हिंदी को भारत की भाषाई विविधता के बीच सेतु बताया।
हिंदी दिवस पर अमित शाह ने कहा कि हिंदी भारतीय भाषाओं को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। उन्होंने लोगों से ग्लोबल भाषाएं सीखने की अपील की, लेकिन अपनी भाषा और जड़ों को न भूलने का संदेश दिया। शाह ने हिंदी को भारत की भाषाई विविधता के बीच सेतु बताया।

Hindi Diwas 2026 : हिंदी दिवस 2026 के अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए विशेष संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि राजभाषा हिंदी देश की सभी भारतीय भाषाओं को साथ लेकर आगे बढ़ रही है। हिंदी आज जन-संचार, सुशासन और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि बदलते समय के साथ हिंदी की भूमिका लगातार व्यापक हो रही है। हिंदी अब केवल लोगों के बीच संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि तकनीक, ज्ञान-विज्ञान, प्रशासन और शोध जैसे क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है। आधुनिक भारत में हिंदी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।

गृह मंत्री ने रेखांकित किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI, डिजिटल टूल्स और आधुनिक सॉफ्टवेयर के विस्तार ने हिंदी के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। तकनीकी बदलावों के साथ हिंदी अब प्रौद्योगिकी और अनुसंधान की भाषा के रूप में भी आगे बढ़ रही है। डिजिटल माध्यमों ने हिंदी की पहुंच को देश और दुनिया में और व्यापक बनाया है।
अमित शाह के मुताबिक हिंदी राजभाषा से आगे बढ़कर लोकभाषा के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सरकारी योजनाओं और नीतियों की जानकारी आम लोगों तक सरल भाषा में पहुंचाने में हिंदी प्रभावी माध्यम है। इससे शासन और जनता के बीच संवाद को अधिक सहज और पारदर्शी बनाने में मदद मिलती है।
हिंदी दिवस के मौके पर अमित शाह ने देश के युवाओं को विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को वैश्विक भाषाएं सीखनी चाहिए और दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन इसके साथ अपनी भाषा, संस्कृति और भाषाई जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने मातृभाषा के महत्व को रेखांकित किया।

गृह मंत्री ने कहा कि मौलिक विचार, नवाचार और बौद्धिक क्षमता के विकास में अपनी भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। व्यक्ति अपनी भाषा में विचारों को अधिक सहजता से समझ और अभिव्यक्त कर सकता है। इसलिए किसी विदेशी भाषा को सीखना उपयोगी हो सकता है, लेकिन उसके कारण अपनी मातृभाषा से दूरी बनाना उचित नहीं है।
अमित शाह ने भाषा को लेकर हीन भावना से बचने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की ज्ञान और क्षमता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि वह किसी विदेशी भाषा या अंग्रेजी को जानता है या नहीं। भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम है, जबकि ज्ञान और प्रतिभा उससे कहीं व्यापक विषय हैं।
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि हिंदी का दूसरी भारतीय भाषाओं के साथ कोई विरोध या प्रतिस्पर्धा नहीं है। तमिल, तेलुगु, मराठी, बंगाली सहित देश की सभी भाषाएं भारत की समृद्ध भाषाई विरासत का हिस्सा हैं। हिंदी इन भाषाओं की सहचरी और पूरक के रूप में आगे बढ़ सकती है।
गृह मंत्री ने कहा कि भारत की भाषाई विविधता उसकी बड़ी ताकत है। देश की सभी भारतीय भाषाएं जब मजबूत होंगी, तभी भारत का सर्वांगीण विकास और अधिक प्रभावी तरीके से संभव होगा। हिंदी दिवस का संदेश इसी भाषाई समन्वय, सांस्कृतिक जुड़ाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने पर केंद्रित रहा।
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