Raipur Farmers Protest: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सोमवार को भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसानों ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। सैकड़ों किसान मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए सड़कों पर उतरे और अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर हुंकार भरी।

किसानों का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं को अनदेखा कर रही है। खासकर खाद की किल्लत, बिजली संकट, और फसलों की उचित कीमत जैसे मुद्दे अब बर्दाश्त के बाहर हो चुके हैं।

किसानों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सरकार के सामने निम्नलिखित मुख्य मांगें रखी हैं:
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समय पर खाद की आपूर्ति की जाए, जिससे रबी सीजन की बुवाई पर असर न पड़े।
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24 घंटे कृषि कार्यों के लिए बिजली उपलब्ध कराई जाए और घरेलू बिजली बिल आधा किया जाए।
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धान खरीदी में 40 किलो 700 ग्राम से अधिक की तुलाई न हो, ताकि किसानों को नुकसान न हो।
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खाद की कालाबाजारी को रोका जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
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दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रति हेक्टेयर 20 हजार रुपये का अनुदान दिया जाए।
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गन्ना को कृषक उन्नति योजना में शामिल किया जाए और उसका रेट 500 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए।
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जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अनुदान दिया जाए।
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सिंचाई का रकबा बढ़ाया जाए ताकि फसलों की उत्पादकता में इजाफा हो।
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पिछली सरकार की बकाया राशि किसानों को तत्काल जारी की जाए।
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Agristek पोर्टल की विसंगतियां दूर की जाएं, जिससे किसानों को रजिस्ट्रेशन और लाभ लेने में परेशानी न हो।
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मक्का और सूरजमुखी की एमएसपी पर खरीदी सुनिश्चित की जाए।
किसानों ने चेताया, मांगें नहीं मानी गईं तो करेंगे बड़ा आंदोलन
प्रदर्शनकारी किसानों ने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन करेंगे। किसान संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वे राजनीतिक दबाव के शिकार नहीं हैं, बल्कि सिर्फ किसानों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।
भारतीय किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “राज्य में बिजली संकट, खाद की किल्लत और एमएसपी की अनदेखी किसानों की कमर तोड़ रही है। यह सरकार की प्राथमिकता में किसान नहीं हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।”
प्रशासन की सतर्कता
किसानों के आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने रायपुर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। मुख्यमंत्री निवास के आसपास बैरिकेडिंग और पुलिस बल की तैनाती की गई है। प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए अधिकारियों की टीम लगातार मौके पर मौजूद है।छत्तीसगढ़ में किसानों की नाराजगी अब खुले प्रदर्शन का रूप ले चुकी है। उनकी मांगें केवल आर्थिक नहीं, बल्कि कृषि नीति और कार्यप्रणाली में सुधार से जुड़ी हैं। राज्य सरकार के लिए यह एक चेतावनी संकेत है कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो किसान आंदोलन और उग्र हो सकता है।











