Iran US Conflict : पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के बीच तनाव कम होने के संकेत फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। इसी बीच ईरान ने बातचीत और सैन्य कार्रवाई को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने कहा कि उनका देश सही समय पर अपनी सैन्य क्षमता का इस्तेमाल करेगा और इसके बाद कूटनीति के जरिए हासिल बढ़त को मजबूत करने की कोशिश करेगा। उनके बयान से संकेत मिलता है कि तेहरान सैन्य दबाव और बातचीत, दोनों रास्तों को अपनी रणनीति का हिस्सा मान रहा है।
गालीबाफ बोले- सैन्य ताकत के साथ कूटनीति भी जरूरी
ईरानी संसद को संबोधित करते हुए गालीबाफ ने कहा कि युद्ध और बातचीत को एक-दूसरे का विकल्प मानना सही नहीं है। उनके मुताबिक, ईरान को परिस्थितियों के अनुसार सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक प्रयास दोनों जारी रखने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सैन्य मोर्चे पर महत्वपूर्ण सफलता हासिल हो जाए और विरोधी कमजोर स्थिति में पहुंच जाए, तब कूटनीति के जरिए उस स्थिति को मजबूत किया जा सकता है। गालीबाफ ने ईरान की बातचीत संबंधी स्थिति को स्पष्ट, तर्कसंगत और गैर-समझौतावादी बताया।
सात शर्तें पूरी होने तक बंद रहेगा होर्मुज
गालीबाफ ने कहा कि ईरान की शर्तें पूरी होने और अमेरिका की प्रतिबद्धताओं को लागू किए जाने तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान अपने अधिकारों की मान्यता और अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के पालन को महत्वपूर्ण मानता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया संदेश
ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रजई ने भी अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर अहम जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि तेहरान ने कतर के मध्यस्थ के जरिए वॉशिंगटन तक अपनी शर्तें पहुंचाई हैं। रजई के अनुसार, ईरान अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है। हालांकि, ईरान ने सार्वजनिक रूप से अपनी सभी सात शर्तों का पूरा विवरण जारी नहीं किया है।
युद्ध खत्म करने के लिए तीन प्रमुख मांगें सामने आईं
मोहसिन रजई ने सार्वजनिक रूप से जिन प्रमुख मांगों का उल्लेख किया है, उनमें सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, ईरान के फ्रीज किए गए धन को जारी करना और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म करना शामिल है। उन्होंने कहा कि बातचीत शुरू करने के लिए ईरान ने कुल सात शर्तें अमेरिका के सामने रखी हैं। रजई ने यह भी कहा कि यदि अमेरिकी पक्ष इन शर्तों को स्वीकार नहीं करता है तो ईरान निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार है।
ईरान ने बातचीत के साथ संघर्ष की तैयारी भी बताई
रजई के मुताबिक, तेहरान संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त करने की दिशा में प्रयास कर रहा है, लेकिन सैन्य विकल्प को भी खुला रखा गया है। उन्होंने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और क्षेत्र में अमेरिकी हितों को लेकर ईरान की तैयारियों का भी उल्लेख किया। उनके बयान के अनुसार, ईरान ने अपनी सैन्य योजना में बदलाव किए हैं और संभावित भविष्य के हमले की स्थिति के लिए तैयारी कर रहा है। हालांकि, ये दावे ईरानी अधिकारियों के सार्वजनिक बयानों पर आधारित हैं।
कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता जारी
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को दोबारा शुरू कराने के प्रयासों में क्षेत्रीय मध्यस्थों की भूमिका भी सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, कतर और पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच संवाद बहाल कराने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में तेहरान की सात शर्तें और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित प्रतिक्रिया आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल ईरान की ओर से सैन्य दबाव और कूटनीतिक प्रयासों को साथ-साथ आगे बढ़ाने का संकेत दिया गया है।
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