Russia Oil Sanctions: रूस से जुड़े व्यापारिक संबंधों को लेकर ब्रिटेन की सरकार ने एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया है। ब्रिटेन ने रूस की तेल कंपनियों के साथ-साथ भारत की नायरा एनर्जी लिमिटेड (Nayara Energy Limited) पर भी नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। यह फैसला रूस पर लगाए जा रहे व्यापक आर्थिक प्रतिबंधों (Economic Sanctions) के तहत लिया गया है। ब्रिटेन के विदेश कार्यालय (Foreign Office) की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ये प्रतिबंध उन कंपनियों पर लगाए गए हैं जिन पर रूस के ऊर्जा सेक्टर को समर्थन देने और उसे फंडिंग करने का आरोप है। नायरा एनर्जी क्यों बनी निशाना? प्रतिबंधित कंपनियों की सूची में भारत की नायरा एनर्जी लिमिटेड का नाम शामिल है, जो रूस की प्रमुख तेल कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) से आंशिक रूप से जुड़ी हुई है। ब्रिटेन का तर्क है कि रोसनेफ्ट से जुड़े होने के कारण नायरा एनर्जी रूस के ऊर्जा क्षेत्र को अप्रत्यक्ष रूप से सहायता पहुँचा रही है। राजनीतिक और कूटनीतिक झटका ब्रिटेन का यह फैसला भारत के लिए कूटनीतिक और व्यापारिक रूप से एक बड़ा झटका है। यह प्रतिबंध ऐसे समय में लगाए गए हैं जब कुछ ही दिन पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर भारत की यात्रा पर आए थे। उन्होंने मुंबई में भारतीय कारोबारियों और निवेशकों से मुलाकात कर व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की बात कही थी। प्रधानमंत्री स्टार्मर की भारत यात्रा के तुरंत बाद रूस की फंडिंग रोकने का तर्क देते हुए ब्रिटेन द्वारा प्रतिबंध लगाना भारत सरकार और व्यापार जगत को अचंभित कर गया है। यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के माहौल को प्रभावित कर सकता है। रूस के खिलाफ व्यापक प्रतिबंधों का हिस्सा पश्चिमी देश, विशेषकर ब्रिटेन, यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर रूस को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य रूस के तेल और गैस राजस्व के प्रवाह को रोकना है, ताकि रूस के पास युद्ध के लिए धन की कमी हो। नायरा एनर्जी पर लगाए गए ये प्रतिबंध दर्शाते हैं कि पश्चिमी देश अब उन गैर-पश्चिमी कंपनियों को भी अपने दायरे में ले रहे हैं जो किसी भी तरह से रूसी ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी हैं, भले ही उनका मुख्यालय या संचालन कहीं और हो। फिलहाल, इस मामले पर भारत सरकार या नायरा एनर्जी की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत इन प्रतिबंधों को कैसे देखता है और क्या यह रूस के साथ उसके व्यापारिक संबंधों की नीति में कोई बदलाव लाता है। Read More : इतिहास के सबसे कम उम्र के उपकप्तान बने Vaibhav Suryavanshi, रणजी ट्रॉफी में सचिन-कोहली को पछाड़ा
















