Paddy Farming Azolla Benefit : पारंपरिक तरीके से धान की खेती करने वाले किसानों के लिए खेती की लगातार बढ़ती लागत एक अत्यंत गंभीर और बड़ी समस्या बनती जा रही है। विशेष रूप से बाजार में मिलने वाले महंगे यूरिया, डीएपी और अन्य रासायनिक खादों पर होने वाला भारी खर्च किसानों के बजट को पूरी तरह बिगाड़ देता है। इस आर्थिक संकट से निपटने के लिए कृषि वैज्ञानिक अब किसानों को पारंपरिक खादों के स्थान पर ‘अजोला’ (Azolla) के इस्तेमाल की पुरजोर सलाह दे रहे हैं।

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, अजोला एक बेहद शक्तिशाली और पूरी तरह से प्राकृतिक जैविक खाद है। यह धान की फसल को न केवल सभी जरूरी पोषक तत्व बहुत ही कम लागत में उपलब्ध कराता है, बल्कि हमारी कृषि भूमि यानी मिट्टी की सेहत को भी अंदर से सुधारने में मददगार साबित होता है। आइए जानते हैं कि आखिर धान की रोपाई के बाद खेत में अजोला क्यों छोड़ा जाता है और यह कैसे काम करता है।

आखिर क्या है अजोला?
अजोला वास्तव में पानी की सतह पर उगने वाला एक बहुत ही छोटा और तैरने वाला जलीय फर्न (पौधा) है, जो अनुकूल वातावरण मिलने पर पानी के ऊपर बेहद तेजी से अपनी कॉलोनी बना लेता है। इस नन्हे पौधे की सबसे बड़ी और जादुई खासियत यह है कि इसके भीतर मौजूद सूक्ष्म जीवाणु वायुमंडल में प्राकृतिक रूप से तैर रही नाइट्रोजन गैस को सोख लेते हैं। नाइट्रोजन को अवशोषित करने के बाद यह उसे फसल के लिए आसानी से ग्रहण करने योग्य पोषक तत्व के रूप में परिवर्तित कर देता है। यही मुख्य कारण है कि कृषि जगत में इसे एक सर्वोत्तम और बेहद प्रभावशाली ‘नाइट्रोजन फिक्सिंग’ जैविक उर्वरक (Bio-fertilizer) के रूप में मान्यता दी गई है।
धान के खेतों में अजोला का प्रयोग
फसल विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के अनुसार, धान के खेतों में अजोला का उपयोग करने का एक निश्चित और वैज्ञानिक तरीका होता है। धान के पौधों की रोपाई संपन्न होने के लगभग 15 से 20 दिन बाद, जब पौधे मिट्टी में अपनी पकड़ बना लेते हैं, तब अजोला को पानी से भरे खेतों में डाला जाता है। बशर्ते कि खेत में पर्याप्त मात्रा में पानी जमा होना चाहिए। अनुकूल परिस्थितियां पाते ही अजोला पानी की ऊपरी सतह पर एक हरी चादर की तरह फैलने लगता है। यह पौधा जैसे-जैसे पानी में अपनी वृद्धि करता है, वैसे-वैसे यह मिट्टी की निचली परतों में प्रचुर मात्रा में नाइट्रोजन और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व लगातार छोड़ता रहता है। बाद में जब खेत का पानी सूखता है, तो यह हरी खाद (Green Manure) की तरह सड़कर मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा को कई गुना बढ़ा देता है।
यूरिया के खर्च में 30% तक की भारी बचत
धान की फसल को अपनी शुरुआती और मुख्य बढ़वार के लिए बहुत बड़ी मात्रा में नाइट्रोजन की आवश्यकता होती है, जिसकी पूर्ति के लिए आम किसान आंख मूंदकर खेतों में यूरिया का छिड़काव करते हैं। चूंकि अजोला पूरी तरह से प्राकृतिक और मुफ्त रूप से फसल को प्रचुर नाइट्रोजन उपलब्ध करा देता है, इसलिए इसके प्रयोग से खेतों में यूरिया और अन्य महंगे रासायनिक खादों की जरूरत सीधे 25 से 30 प्रतिशत तक कम हो जाती है। खादों की मांग घटने से किसानों का पैसा बचता है और धान की खेती घाटे के सौदे से निकलकर एक अत्यधिक लाभकारी व्यवसाय में बदल जाती है। इसके अलावा, रासायनिक खादों के अंधाधुंध उपयोग से बंजर हो रही मिट्टी को अजोला में मौजूद ऑर्गेनिक कार्बन नया जीवन प्रदान करते हैं, जिससे भूमि की उपजाऊ क्षमता लंबे समय के लिए सुरक्षित हो जाती है।
खरपतवार की छुट्टी और पशुपालन में दोहरा लाभ
अजोला केवल खाद का ही काम नहीं करता, बल्कि यह किसानों की दो अन्य बड़ी समस्याओं का भी एक साथ समाधान करता है:
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खरपतवार नियंत्रण: अजोला बहुत कम समय में पानी की पूरी सतह को एक मोटी हरी परत से पूरी तरह ढक लेता है। इसके कारण सूर्य की रोशनी और किरणें पानी के नीचे मौजूद खरपतवार के बीजों तक नहीं पहुंच पाती हैं, जिससे अवांछित घास या खरपतवार की वृद्धि अपने आप रुक जाती है। नतीजा यह होता है कि किसानों को महंगे विडनाशकों और निराई-गुड़ाई के श्रम पर फालतू खर्च नहीं करना पड़ता।
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पशुओं के लिए पौष्टिक चारा: अजोला के पौधों में लगभग 20 से 30 प्रतिशत तक शुद्ध वनस्पति प्रोटीन पाया जाता है, जो दुधारू पशुओं के लिए एक बेहतरीन और पौष्टिक आहार है। बहुत से प्रगतिशील किसान धान के खेत से अतिरिक्त अजोला निकालकर उसे अपने गाय-भैंसों को चारे के रूप में खिला रहे हैं। इससे पशुओं का दूध उत्पादन बढ़ता है और किसान भाई पशुपालन के जरिए अतिरिक्त बंपर मुनाफा कमाने में सफल हो रहे हैं।
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