PoK Protests : PoK में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई तेज, जेएएसी नेताओं पर 1 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का इनाम

PoK Protests :  पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इन दिनों हालात बेहद विस्फोटक और नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं। अपने बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों और हक की आवाज बुलंद करने वाले शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और स्थानीय पुलिस ने अंधाधुंध और बेरहमी से गोलियां बरसाई हैं। इस भीषण और हिंसक सैन्य कार्रवाई में अब तक 100 से अधिक स्थानीय नागरिकों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 400 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। क्षेत्र में चारों तरफ दहशत और तनाव का माहौल है। इस बर्बर दमन चक्र के बीच वहां के स्थानीय प्रशासन ने विरोध प्रदर्शनों की कमान संभालने वाले मुख्य संगठन ‘संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) के खिलाफ एक नया तानाशाही फरमान जारी कर दिया है।

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जेएएसी के चार शीर्ष नेताओं की गिरफ्तारी पर एक करोड़ रुपये का भारी इनाम

पीओके के कठपुतली प्रशासन ने एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करते हुए आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के चार शीर्ष नेताओं के सिर पर भारी भरकम इनाम की घोषणा की है। प्रशासन के मुताबिक, जो भी व्यक्ति इन प्रतिबंधित नेताओं को पकड़वाने या उनकी सटीक लोकेशन की जानकारी देगा, उसे 1 करोड़ पाकिस्तानी रुपये (10 मिलियन) का नकद पुरस्कार दिया जाएगा। अधिसूचना में चालाकी से लिखा गया है कि “आजाद जम्मू और कश्मीर” के राष्ट्रपति को इन अपराधियों की गिरफ्तारी में मदद करने वालों को इनाम देने में प्रसन्नता होगी। साथ ही, डर के माहौल को देखते हुए सूचना देने वाले नागरिकों की पहचान पूरी तरह से गुप्त रखने का भरोसा भी दिया गया है।

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सीट आरक्षण का विवाद और नागरिक समाज के गुस्से की मुख्य वजह

वास्तव में, यह पूरा विवाद 27 जुलाई को होने वाले आगामी चुनावों से ठीक पहले शुरू हुआ था। जेएएसी (JAAC) वहां का एक बेहद प्रमुख और सक्रिय नागरिक समाज संगठन है, जिसने चुनावों में 45 में से 12 विधानसभा सीटें तथाकथित शरणार्थियों के लिए आरक्षित करने के सरकार के एकतरफा फैसले के खिलाफ बड़े पैमाने पर आंदोलन का आह्वान किया था। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यह उनके राजनीतिक अधिकारों को छीनने की साजिश है। सीट आरक्षण के इस बड़े मुद्दे के अलावा, प्रदर्शनकारियों ने पूर्व में हुई पुलिसिया हिंसा, हफ्तों से जारी इंटरनेट बंदी, बिजली की भारी किल्लत, कमरतोड़ महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी, स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के कथित दोहन और अपनी राजनीतिक उपेक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

सुरक्षा के नाम पर संगठन को प्रतिबंधित करना और आतंकवाद का झूठा ठप्पा

पिछले हफ्ते पाकिस्तानी हुक्मरानों ने सार्वजनिक व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा का हवाला देते हुए संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी पर आधिकारिक रूप से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। पाकिस्तानी तंत्र द्वारा इस नागरिक संगठन को “आतंकवादी संगठन” घोषित किए जाने पर समूह के सदस्यों और स्थानीय जनता ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका साफ कहना है कि यह उनकी आवाज को हमेशा के लिए दबाने और शांतिपूर्ण राजनीतिक आंदोलन को कुचलने की एक दमनकारी और दंडात्मक कार्रवाई है। सरकार की इस दमनकारी नीति के चलते क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को अवैध रूप से गिरफ्तार कर जेलों में डाल दिया गया है।

भारत ने की अंतरराष्ट्रीय मंच पर कड़ी निंदा और पाकिस्तान को घेरा

भारत ने मंगलवार को पीओके में निर्दोष प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की गई इस क्रूर और हिंसक कार्रवाई की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा की है। नई दिल्ली ने वैश्विक समुदाय से एकजुट होकर पाकिस्तान को इस घोर मानवाधिकार उल्लंघन के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराने की पुरजोर अपील की है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हम उम्मीद करते हैं कि वैश्विक शक्तियां पाकिस्तान को उसके इन अमानवीय और गलत कृत्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पूरी तरह से जवाबदेह ठहराएंगी।

पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की गंभीर चिंता और पारदर्शी समाधान की मांग

इस बीच, खुद पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRPC) ने भी क्षेत्रीय प्रशासन द्वारा जेएएसी को आतंकवाद विरोधी सख्त कानून के तहत प्रतिबंधित किए जाने पर गहरी चिंता और नाराजगी जताई है। अपने कड़े बयान में मानवाधिकार आयोग ने अत्यधिक बल प्रयोग, बेकसूर नागरिकों की मौतों और बार-बार की जा रही इंटरनेट बंदी की तीखी आलोचना की है। आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक इस विवादित क्षेत्र के लोगों को राजनीतिक रूप से अधिकारहीन रखा जाएगा और उनके बुनियादी हक छीने जाएंगे, तब तक सरकार के साथ कोई भी बातचीत सार्थक या सफल नहीं हो सकती। नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा होनी चाहिए और उनकी जायज शिकायतों का पारदर्शी तरीके से तत्काल समाधान निकाला जाना चाहिए।

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Chandan Das

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