Supreme Court Warning : सुप्रीम कोर्ट ने देश में न्यायपालिका के सदस्यों और उनके परिवारों पर बढ़ते हमलों तथा मिल रही धमकियों पर बेहद गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जजों को इसी तरह डराया और धमकाया जाता रहा, तो पूरी न्याय व्यवस्था चरमरा जाएगी। अदालत की यह तल्ख टिप्पणी विशेष रूप से बॉम्बे हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस जी.एस. पटेल और उनके परिवार को हाल ही में मिली गंभीर धमकियों की मीडिया रिपोर्टों के बाद सामने आई है। माननीय सर्वोच्च अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष न्याय के लिए जजों की सुरक्षा सर्वोपरि है।

न्याय व्यवस्था पर सीधा प्रहार
न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने इस बेहद संवेदनशील मामले की गंभीरता को रेखांकित किया। बेंच ने कहा कि जजों को निशाना बनाने वाली ऐसी हिंसक और डरावनी घटनाएं सीधे तौर पर हमारी स्थापित कानूनी और न्याय व्यवस्था की जड़ों पर चोट करती हैं। अदालत ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि सुरक्षा का ऐसा माहौल रहेगा, तो यह जजों को बिना किसी डर या पक्षपात के अपने कर्तव्यों का पालन करने से रोकेगा। कानून के शासन को बनाए रखने के लिए जजों का निडर होना अनिवार्य है, अन्यथा आम नागरिकों का न्याय प्रणाली से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।

अदालत की नाराजगी
शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान हालिया घटनाओं का विशेष उल्लेख किया। बेंच ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि आपने निश्चित रूप से अखबारों में पढ़ा होगा कि बॉम्बे हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज को डराने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। यहां तक कि लंदन में उनकी पोती पर जानलेवा हमला भी किया गया। जजों को उनके द्वारा दिए गए फैसलों के लिए इस तरह प्रताड़ित किया जा रहा है। बेंच ने गंभीर लहजे में सवाल उठाया कि अगर जो जज न्याय कर रहे हैं, उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जाएगा, तो देश का कोई भी जज भविष्य में कोई भी फैसला सुनाने की हिम्मत नहीं कर पाएगा।
ऐतिहासिक फैसले के बाद से लगातार मिल रही हैं गंभीर धमकियां
उल्लेखनीय है कि बॉम्बे हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, जस्टिस जी.एस. पटेल को अप्रैल 2024 में दाऊदी बोहरा समुदाय के नेतृत्व विवाद पर एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाने के बाद से ही लगातार धमकियां मिल रही हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, न केवल जस्टिस पटेल बल्कि विदेशों में रह रहे उनके परिवार के सदस्यों को भी लगातार डराया-धमकाया जा रहा है। लंदन में रहने वाली उनकी बेटी और पोती को भी हिंसा का शिकार बनाया गया है। इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के गंभीर मामले को देखते हुए अब भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके), दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस अधिकारी मिलकर इसकी गहन जांच कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश के मजिस्ट्रेट पर हमले के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह पूरी चर्चा याचिकाकर्ता प्रियांशु सिंह की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान हुई। आरोपी प्रियांशु सिंह पिछले सात महीनों से अधिक समय से जेल में बंद है। उस पर आरोप है कि उसने मध्य प्रदेश में एक स्थानीय मजिस्ट्रेट के घर पर तोड़फोड़ और हमले की हिंसक घटना की अगुवाई की थी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, यह हमला तब किया गया था जब मजिस्ट्रेट ने आरोपी सिंह की एक अन्य मामले में जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। अदालत ने इस प्रवृत्ति को बेहद खतरनाक माना जहां न्यायिक आदेशों के खिलाफ जजों के घरों पर हमले किए जा रहे हैं।
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